शहीदों के सहायतार्थ मोरारी बापू की रामकथा को जैन धर्म गुरु आचार्य लोकेशजी का समर्थन

- शहीदों की सहायतार्थ रामकथा को आचार्य लोकेश ने समर्थन दिया
- भगवान श्री राम भारतीय संस्कृति के और शहीद भारत देश के संरक्षक – आचार्य लोकेश
- राम राष्ट्रकथा का उद्देश्य शहीदों की सहायता करना – मुरारी बापू
शहीदों के सहायतार्थ देश की सबसे बड़ी रामकथा को संबोधित करते हुए अहिंसा विश्व भारती के संस्थापक जैन आचार्य डा. लोकेश मुनि ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम भारतीय संस्कृति के संरक्षक है और सैनिक देश के रखवाले | सूरत में 500 बीघा जमीन पर आयोजित मुरारी बापू की रामकथा का उद्देश्य सैनिक कल्याण है। यहां एकत्रित रुपए इसी उद्देश्य के लिए दान किए जाएंगे। इसीलिए इसकानाम दिया गया राम-राष्ट्रकथा।
आचार्य लोकेश ने कहा कि राम कथा के माध्यम से शहीदों को अद्भुत श्रद्धांजलि अर्पित की जा रही है | इसके माध्यम देशवासियों को सन्देश जाता है कि राम भक्ति के साथ देश भक्ति का भी महत्त्व है | उन्होंने कहा कि श्री राम स्वयं एक योद्धा थे जिन्होंने सभी जाति, वर्ग, सम्प्रदाय के सैनिके को एकजुट कर देश के स्वाभिमान की रक्षा की थी | देश के विभिन्न प्रान्तों, धर्मों, जाति और सम्प्रदाय के भारतीय सैनिक एकजुट होकर देश की सीमाओं की सुरक्षा तो करते ही है साथ ही देश पर कोई आपदा आने पर सेवा के लिए सदैव तत्पर रहते है | हमारा कर्तव्य है कि हम अपने धर्म का पालन करने के साथ जिन सेनिकों ने देश के लिए अपनी जान न्योछावर कर दी उनके परिवारों की दिल खोल कर सहायता करें |
परम पूज्य श्री मोरारी बापू ने कहा कि राम राष्ट्रकथा का उद्देश्य शहीदों की सहायता करना है | वास्तव में राम केवल युद्ध पुरुष नहीं हैं लेकिन बुद्ध पुरुष है | योद्धा तो वह है कि जब युद्ध की स्थिति का निर्माण हो तो निस्वार्थ भाव से युद्ध करे। बुद्ध पुरुष जब बोलते है तो वचन सुनने से संसारिक मोह कम हो जाता है। बापू ने कहा कि विश्व का परम सत्य मौत है, समय आने पर सबको मौत आनी है। राम प्रेम में दशरथ ने प्राण त्याग दिए। जटायू सीताजी को बचाने के लिए शहीद हो गए। वह सीताजी का संदेश राम को पहुंचाने तक जीवित रहे। इसके अलावा उन्होंने अपनी कथा में दान की महिमा भी बतायी।उन्होंने कहा कि संत और सेना का समागम केवल भारत में ही संभव है।
कथा से पूर्व सैनिकों और शहीदों के परिवार द्वारापोथीयात्रा निकाली कथा का आरंभ राष्ट्र ध्वज फहराने के बाद राष्ट्रगान से हुआ | इसमें अमेरिका, यूरोप, न्यूजीलैंड,ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका आदि देशों से समागत लोगो ने भी भाग लिया | नौ दिन तक चलने वाली इस कथा में हर दिन1.5 लाख श्रद्धालु आ रहे है |
Editorial Review Note
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