अक्षय तृतीया तिथि 25 अप्रैल 2020 को 11:51 मिनट से प्रारंभ होकर 26 अप्रैल 13:22 दोपहर तक रहेगी। इस दिन को परशुराम जयंती के तौर पर भी मनाया जाता है। लिहाजा इस दिन को महामृत्युंजय मंत्र के जप के साथ भगवान परशुराम की पूजा का दिन भी माना जाता है।
रामायण और महाभारत में मिल चुका है भगवान परशुराम का जिक्र
भगवान विष्णु के सभी अन्य अवतारों से अलग भगवान परशुराम को अमर अविनाशी और सभी विद्याओं का दाता माना जाता है। रामायण में भगवान श्रीराम के शिव धनुष प्रसंग में उनका जिक्र आता है।
वहीं मान्यता है कि महाभारत में महर्षि परशुराम ने ही पितामह भीष्म और महारथी कर्ण को धनुर्विद्या सिखाई थी। वहीं एक किंवदंती ये भी प्रचलित है कि उन्होंने 21 बार पूरी धरती से क्षत्रियों की हत्या करके इस धरती को ब्राह्मणों को दान में दे दी थी। इस दिन भगवान परशुराम की पूजा करके उनका ध्यान करना चाहिए।
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परशुराम के 12 नामों का जप करने से मिलता है आशीर्वाद
श्री रेणुका तंत्र में परशुराम जी के 12 नाम है जिनके नित्य पाठ करने से परशुराम जी प्रसन्न होकर इच्छित फल देते हैं यह नाम है जामदग्न्य ,जगत्रेता, ब्राह्मण्य, ब्रह्मवत्सल, कीर्तवीर्यकुलोच्छेत्ता,क्षत्रवंशप्रताप न, विश्वजिद्दीक्षित,राम,कश्यपाशा सुरद्रम,परश्वधधर,शांत एवं महेंद्र कृतकेतन।
इन नामों का जप करके भगवान परशुराम की पूजा की जाती है। इस एक दिन सारे बिगड़े हुए काम भी बन जाते हैं। ज्योतिष के मुताबिक वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि “अक्षय तृतीया” कहलाती है।
महामृत्युंजय का जप करने से दूर हो सकती है बीमारियां
शास्त्रों के अनुसार अक्षय तृतीया तिथि में किए गए पुण्य कार्य अक्षय फल देने वाले हैं। इस दिन भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम जी का जन्म उत्सव भी बनाया जाता है।
अक्षय तृतीया पर इस बार जीवन रक्षक मंत्र महामृत्युंजय मंत्र का सामूहिक पाठ कर करने से किसी भी तरह की बीमारी को पछाड़ कर निरोगी बना जा सकता है।
हालांकि इस बार पाठ करने के लिए एक जगह इकट्ठा तो नहीं हुआ जा सकता, मगर घर पर ही इस मंत्र के जप की माला करने से लाभ मिलता है।
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