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चैत्र नवरात्र विशेष : राजस्थान के प्रमुख शक्तिपीठ : फिल्मों में भी हुआ है महिमा का बखान

चैत्र नवरात्र विशेष : राजस्थान के प्रमुख शक्तिपीठ : फिल्मों में भी हुआ है महिमा का बखान

चैत्र नवरात्र विशेष : राजस्थान के प्रमुख शक्तिपीठ : फिल्मों में भी हुआ है महिमा का बखान
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चैत्र नवरात्र विशेष : राजस्थान के प्रमुख शक्तिपीठ : फिल्मों में भी हुआ है महिमा का बखान

नवरात्र विशेष : राजस्थान के प्रमुख शक्तिपीठ: फिल्मों में भी हुआ है महिमा का बखान

रविवार से चैत्र नवरात्र शुरू हो रहे हैं। सुबह से ही मंदिरों और घरों में घट स्थापना होगी और भक्त आठ दिन तक माता की आराधना में लीन रहेंगे।

8 दिन के होंगे नवरात्र

अष्ठमी और नवमी एक ही दिन होने की वजह से इस बार भी नवरात्र आठ दिन के होंगे। 25 मार्च को अष्ठमी और नवमी तिथि एकसाथ पड़ेगी।इस बार माता की सवारी हाथी होगी और मांग पर सवार होकर आएंगी।

नवरात्र के दौरान देशभर के शक्तिपीठों पर माता के दरबार सजेंगे और मेले भरेंगे। राजस्थान में स्थित प्रमुख शक्तिपीठों पर भी श्रद्धा का सैलाब उमड़ेगा। देशभर से भक्त मां के दर्शनों के लिए पहुंचेंगे और अष्ठमी को लाखों श्रद्धालु मां के दरबार में माता टेकेंगे। आइए जानते हैं राजस्थान के प्रमुख शक्तिपीठों के बारे में जिनकी महिमा का फिल्मों में भी बखान हो चुका है और जहां वीवीआईपी भी ढोक लगाने पहुंचते हैं।

तनोट माता (जैसलमेर)

जैसलमेर के पास भारतपाकिस्तान बॉर्डर पर स्थित तनोट माता की शक्ति को पड़ोसी देश पाकिस्तान भी महसूस कर चुका है। 1965 और 1971 में भारतपाकिस्तान युद्ध के दौरान तनोट माता के चमत्कार से सारी दुनिया वाकिफ है।

इन युद्दों के दौरान पाकिस्तानी सेना की ओर से फेंके गए हजारों बम माता के मंदिर का कुछ नहीं बिगाड़ पाए। इनमें से 450 बम तो फटे तक नहीं, जो मंदिर के म्यूजियम में आज भी मौजूद हैं।

1971 में भी माता की कृपा से लोंगेवाला में भारतीय सैनिकों ने पाकिस्तानी टैंकों को तबाह कर दिया था और पूरी पाकिस्तानी रेजीमेंट को खत्म कर दिया। दुश्मन पर इस जीत के बाद मंदिर में ही विजय स्तंभ का निर्माण करवाया गया जहां हर साल 16 दिसंबर को शहीद भारतीय सैनिकों को याद किया जाता है। भारतीय सैनिकों की तनोट माता के प्रति अटूट श्रद्धा है। सीमा पर ड्यूटी करने जाने से पहले जवान मां के मंदिर में हाजिरी जरूर लगाते हैं।

फिल्म बॉर्डर में भी तनोट माता के चमत्कार को फिल्मांकन के जरिए दिखाया गया है।   

सैनिक ही संभालते हैं मंदिर की व्यवस्थाएं

1965 के युद्ध के बाद बीएसएफ ने मंदिर में ही अपनी चौकी स्थापित कर ली।मंदिर का जीर्णोद्वार करवाया और एक म्यूजियम भी बनवाया।इसी म्यूजियम में पाकिस्तानी सेना की ओर से फेंके गए बम रखे हुए हैं।बीएसएफ ट्रस्ट ही मंदिर संचालन का जिम्मा संभाले हुए है।

नवरात्र के दौरान तनोट माता मंदिर में मेला लगता है और हजारों की संख्या में देसीविदेशी श्रद्धालु मनोकामना पूर्ण होने की उम्मीद लेकर माता के दर्शनों के लिए पहुंचते हैं।

मां शाकम्भरी (सीकर)

राजस्थान के सीकर जिले के पास सकराय स्थित मां शाकम्भरी की ख्याति के चले बड़ेबड़े वीवीआईपी भी यहां खिंचे चले आते हैं। यह सिद्ध शक्तिपीठ  मनवांछित फल देने वाली माता के रूप में विख्यात है। कई प्रमुख राजनेता, वॉलीवुड सितारे, उद्योग जगत की हस्तियां और ब्यूरोक्रेट्स माता के दरबार में हाजिरी लगा चुके हैं।

मां शाकम्भरी के मंदिर को लेकर मान्यता है कि हिरण्याक्ष कुल के राक्षस ने ब्रह्मा की तपस्या कर चारों वेदों को प्राप्त कर लिया था तो सौ साल तक अकाल पड़ गया। ऐसे में ऋषि मुनियों ने मां जगदंबे से गुहार लगाई और मां सताक्षी के रूप में प्रकट हुईं। माता के नेत्रों से आंसुओं की धारा प्रवाहित होने लगी जिससे धरती पर जलधारा का संचलन हुआ। माता ने धरती को फिर से धन्यधानसेपरिपूर्णकरदिया।इसीलिए सताक्षी से माता का नाम शाकम्भरी हुआ जिन्हें वनस्पति देवी के नाम से भी जाना जाता है।

मां त्रिपुरा सुंदरी (बांसवाड़ा)

बांसवाड़ा जिले के तलवाड़ा गांव के पास सुरम्य जंगलों में मां त्रिपुरा सुंदरी का दरबार स्थित है। कहा जाता है कि मंदिर से आसपास तीन दुर्ग थे। शक्तिपुरी, शिवपुरी और विष्णुपुरी में स्थित होने की वजह से माता का नाम त्रिपुरा सुंदरी पड़ा। चैत्र नवरात्रों में यहां विशेष यज्ञ का आयोजन होता है। राजस्थान समेत आसपास के राज्यों से भी श्रद्धालु माता के दर्शनों के लिए पहुंचते हैं। गुजरात, मालवा और मारवाड़ के शासक माता के उपासक थे। गुजरात के सोलंकी राजा सिद्ध राज जयसिंह की इष्ट देवी मां त्रिपुरा सुंदरी ही थीं। बताया जाता है कि मालवा के शासक जगदेव परमार ने मां के चरणों में अपना शीश काटकर अर्पण कर दिया था। राजस्थान के पूर्व सीएम स्वर्गीय हरिदेव जोशी की मां त्रिपुरा सुंदरी के प्रति विशेष आस्था थी। मौजूदा मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी अपनी विशेष आस्था के चलते समयसमय पर माता के दरबार में हाजिरी लगाती रहती हैं।

करणी माता (बीकानेर)

करणी माता बीकानेर के राठौड़ वंश की कुलदेवी हैं। बीकानेर के देशनोक स्थित करणी माता मंदिर को चूहों (काबा) वाली माता के नाम से भी जाना जाता है।माता के मंदिर में सैंकड़ों चूहे आराम से विचरण करते देखे जा सकते हैं जो यहां कि खास विशेषता है।यहां आने वाले भक्त इन का बों के दर्शन को बेहद शुभ मानते हैं। ये चूहे जिन्हे काबा कहा जाता है मंदिर के गेट से बाहर नहीं निकलते।

बीकानेर नरेश राज जैतसी ने करणी माता की कृपा से बाबर पुत्र कामरान पर जीत हासिल की थी।इसी जीत के बाद मंदिर निर्माण करवाया गया।इसके बाद राजा सूरत सिंह ने माता की कृपा से मराठों पर विजय प्राप्त की। उन्होंने राव जैतसी द्वारा करवाए गए कच्चे निर्माण की जगह मंदिर का पक्का निर्माण करवाया।

जीण माता (सीकर)

जानकारों के मुताबिक यह जयंती माता का मंदिर है जोन व दुर्गाओं में से एक है।बताया जाता है कि यह मंदिर जयंती माता के बारे में जगत को बताता है। कालांतर में घांघू नरेश की बेटी देवी जीण के विलीन हो जाने के बाद इसे जीण माता मंदिर कहा जाने लगा।

मां के चमत्कार के आगे नतमस्तक हुआ था औरंगजेब

बताया जाता है कि एकबार औरंगजेब ने जीण माता मंदिर को तोड़ने की कोशिश की लेकिन माता के चमत्कार से मधुमक्खियों ने मुगल सेना पर हमला कर दिया। इसके बाद औरंगजेब के सैनिक मैदान छोड़कर भाग गए। खुद औरंगजेब की हालत बेहद गंभीर हो गई तब उसने गलती मानी और मां के मंदिर में अखंड ज्योत जलाने का वचन दिया। इसके बाद औरंगजेब की हालत में सुधार हुआ।

जीण माता लोकदेवी के रूप में मशहूर हैं और नवरात्रों में यहां विशाल मेला लगता है।

कैला देवी (करौली)

करौली जिले से करीब 25 किमी दूर स्थित कैला माता के दरबार में चैत्र नवरात्रों के दौरान लक्खी मेला भरता है। राजस्थान, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश और कई अन्य राज्यों से लाखों श्रद्धालु कैला माता के दरबार में पहुंचते हैं जिनमें भारी संख्या में पैदल यात्री भी होते हैं। विशेषत: उत्तरप्रदेश से भारी संख्या में श्रद्धालु हजारों किलोमीटर की पदयात्रा कर नाचतेगाते कैलादेवी पहुंचते हैं। रास्ते में जगहजगह माता के भक्तों के लिए भंडारे और विश्राम की व्यवस्था रहती है। भक्तगण गाजेबाजे के साथ लांगुरिया गीतों की धुनों पर नाचतेगाते हुए जाते हैं।

जानकारों के मुताबिक भगवान श्रीकृष्ण के पिता वासुदेव और देवकी को जेल में डालकर जिस कन्या योगमाया का वध कंस ने करना चाहा था, वही योगमाया मां कैला के रूप में यहां विराजती हैं।मान्यता यह भी है कि जनता के दुखों के निवारण के लिए मां कैला ने यहां अवतरित होकर नरकासुर नाम के राक्षस का वध किया था।

डांग क्षेत्र और चंबल के बीहड़ो से सटे इलाके में स्थित यह शक्तिपीठ कई बार डकैतों की भक्ति की वजह से भी चर्चा में रहा है। कई बड़े डकैत माता के दरबार में आकर विजय घंट चढ़ा चुके हैं।

करौली वाली माता के नाम से प्रसिद्ध मां कैला देवी के संदर्भ में काफी समय पहले जय करौली मां फिल्म भी बन चुकी है।       

रिपोर्टडॉ. देवेन्द्र शर्मा

ईमेल: sharmadev09@gmail.com   

RW

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By Religion World March 17, 2018 7 min read
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