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भारत के प्रमुख योगगुरु जिन्होंने योग को दी नयी पहचान

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भारत के प्रमुख योगगुरु जिन्होंने योग को दी नयी पहचान

भारत के प्रमुख योगगुरु जिन्होंने योग को दी नयी पहचान

योग को लेकर आज जैसी जागरूकता कभी नही देखी गई। हम सदियों पुरानी भारतीय जीवनशैली को समृद्ध बनाने वाली इस शैली को लेकर आज पूरी दुनिया में हलचल देख रहे हैं। भारत में कई ऐसे गुरु हुए हैं जिन्होंने दुनिया को राह दिखाई। जानिए ऐसे बड़े गुरुओं के बारे में जिन्होंने भारतीय योग परंपरा को समृद्ध बनाया।

श्री अरविंदो (Sri Aurobindo)

कलकत्ता में 15 अगस्त 1872 को जन्मे श्री अरविंदो के जीवन का उद्देश्य धरती पर दिव्य प्रेम का राज्य स्थापित करना है. उन्होंने स्वामी विवेकानंद के विचारों को भी जाना और उनसे अभिभूत हुए. किंतु उनकी साधना की दिशा मनुष्य चेतना पर केन्द्रित थी, वे मानव चेतना को शारीरिक, मानसिक, स्नायविक से होते हुए चैत्य की श्रेणी तक ले जाना चाहते थे. उन्होंने अपनी आध्यात्मिक सहयोगी श्री मां की तपस्या से पांडिचेरी में श्री अरविंद आश्रम की स्थापना की. इसमें 2000 व्यक्ति नियमित रूप से विगत 80 वर्ष से साधना करते आ रहे हैं. अरविंद ने कई किताबे लिखीं. श्री अरविंदो पूर्ण योग के प्रणेता थे, जिसका अर्थ है जो भी काम किया जाए उसमें पूर्ण कौशल तथा पारंगतता प्राप्त करना ही पूर्ण योग है. इससे श्रीकृष्ण जैसे योगी के ‘योग: कर्म सु कोशलम’ वाले आदर्श की याद भी आती है. 5 दिसंबर 1950 को श्री अरबिंदो इस संसार को छोड़ कर चले गए.

तिरुमलाई कृष्णमचार्य (Tirumalai krishnamacharya)

तिरुमलाई कृष्णमचार्य को ‘आधुनिक योग का पितामह’ कहा जाता है. उन्हें आयुर्वेद और योग दोनों का ज्ञान था. मैसूर के महराजा के राज में कृष्णमचार्य ने योग को बढ़ावा देने के लिए पूरे भारत का भ्रमण ‌किया. उन्हें अपनी सांसो की गति पर नियंत्रण रखना भी आता है. वह अपनी धड़कनों पर काबू कर सकते थे.

बी के एस अयंगार ( BKS Iyengar)

बेल्लूर कृष्णामचारी सुंदरराज अयंगार ने अयंगर योग को दुनिया में पहचान दिलवाई थी। उन्होंने योग की पहली शिक्षा अपने गुरू श्री तीरूमलाई कृष्णामाचार्य से ली थी, जो उनके रिश्तेदार भी थे। योग के ज्ञान को अपने तक सीमित न रख कर पूरी दुनिया में फैलाना चाहते थे। इस इच्छा को पूरा करने के लिए उन्होंने लंदन, स्वीट्जरलैंड, पेरिस और कई देशों की यात्रा की और योग का प्रचार किया। उन्होंने कई अनुसंधानों के बाद इस योग के तरीकों का आविष्कार किया था।  योग अभ्यास आठ पहलुओं (अष्टांग योग) पर आधारित होते हैं। लोकप्रियता के कारण इस योग का नाम अयंगर योग पड़ गया। अयंगर योग में 200 योग आसन और 14 प्राणायम हैं, जो क्रमानुसार सरल से जटिलतर होते जाते हैं।

स्वामी शिवानन्द (Swami Shivanand)

स्वामी शिवानंद पेशे से डॉक्टर थे और इनका मानना था कि एक योगी को अपने योग में सबसे उपर हास्य को रखना चाहिए. उन्होंने एक गाना भी बनाया था जिसमें 18 गुणों की चर्चा की गई थी. उनका कहना था कि ये हर योगी को प्रयोग में लाना चाहिए. उन्होंने दुनिया को त्रिमूर्ति योग से परिचित कराया जिसमें हठ योग, कर्म योग और मास्टर योग शामिल है.

महर्षि महेश योगी (Mahrishi Mahesh Yogi)

महर्षि महेश योगी ट्रांसैडेंटल मेडिटेशन के प्रवर्तक है. इसके अतंर्गत आँख बंद कर के मंत्र पढ़ते हुए ध्यान किया जाता है. ट्रांसैडैंटल मेडिटेशन ऐसा ध्यान है जिसमें ध्यान करने वाला व्यक्ति भाव से परे हो जाता है.

परमहंस योगानंद (Parmhans Yogananda)

परमहंस योगानंद क्रिया योग के प्रवर्तक हैं. उन्होंने पश्चिम के लोगों को क्रिया योग से परिचित कराया. क्रिया योग में क्रिया के माध्यम से योगी अपना सारा जोर क्रियाओं को एकजुट करने पर डाला जाता है.

यह भी पढ़ें – योग और हिमालय की संस्कृति का विश्व के विभिन्न देशों में होगा विस्तार

जग्गी वासुदेव (Jaggi vasudev)

जग्गी वासुदेव को उनके जानने वाले उन्हें सद्गुरु के नाम से जानते हैं. वासुदेव कर्नाटक के रहने वाले है. उन्होंने इशा फांउंडेशन की शुरुआत की थी और उसके माध्यम से पूरी दुनिया को योग सिखाते हैं. इन्होंने 1996 में भारतीय हॉकी टीम को भी योग अभ्यास कराया था.

श्री श्री रविशंकर (Shri shri Ravishankar)

ऑर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर योग कि दुनिया में अपनी ‘सुदर्शन क्रिया’ से प्रचलित हैं. इस के अंतर्गत सांस को कैसे और किस प्रक्रिया में शरीर के भीतर लें और उसे बाहर छोड़े. रविशंकर इसे एक कविता की तरह मानते हैं.

इसे भी पढ़ें – नवरात्रि विशेष : “अक्षर ब्रम्ह योग” (8वां अध्याय – श्री कृष्ण द्वारा अर्जुन के पूछे सात प्रश्नों के उत्तर) : गायत्री परिवार

बाबा रामदेव (Baba Ramdev)

आज अगर योग को दुनिया इतने वृहद स्तर पर जानती है तो उसका अधिकतम श्रेय लोग बाबा रामदेव को ही देते हैं. अपने कपालभाती और अनुलोम विलोम व्यायाम ने बाबा रामदेव को और भी पहचान दिलाई. उन्होंने योग को टीवी के माध्यम से लोगों के दहलीज तक पहुंचाया.

बिक्रम चौधरी (Bikram choudhury)

बिक्रम चौधरी का नाम आधुनिक योग गुरुओं में शुमार है. उनके बिक्रम योगा के पश्चिम के लोग खासे दीवाने हैं। घुटनों में लगी चोट के दर्द को उन्होंने योग की मदद से ठीक किया और फिर इसको ही अपना सब कुछ मान कर लोगों को योग सीखाना शुरु कर दिया. बिक्रम अपने बिक्रम योगा के कारण खासे मशहूर हैं.

यह भी पढ़ें – ईरान के मुस्लिमों को भा रहा है योग और ध्यान

 

RW

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By Shweta May 31, 2018 5 min read
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