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हरतालिका तीज पर इस तरह शिव पार्वती का पूजन, पढ़ें व्रत कथा

हरतालिका तीज पर इस तरह शिव पार्वती का पूजन, पढ़ें व्रत कथा

हरतालिका तीज पर इस तरह शिव पार्वती का पूजन, पढ़ें व्रत कथा
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हरतालिका तीज पर इस तरह शिव पार्वती का पूजन, पढ़ें व्रत कथा

हरतालिका तीज 21 अगस्त को मनाई जाएगी। इस दिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु की कामना करती हैं। वहीं, कुंवारी कन्याएं मनचाहा वर पाने के लिए यह व्रत करती हैं। इस दिन सुहागिन महिलाओं को सिंदूर, मेहंदी, बिंदी, चूड़ी, काजल आदि भी दिए जाते हैं। तो चलिए पढ़ते हैं हरतालिका व्रत  पूजन विधि और कथा ।



हरितालिका तीज की पूजन विधि

हरतालिका तीज पर बालू रेत से भगवान गणेश, भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा बनाएं।

इन प्रतिमाओं को एक चौकी पर स्थापित कर दें।

फिर उस चौकी पर चावलों से अष्टदल कमल बनाएं। इसी पर कलश की स्थापना करें।

कलश में जल, अक्षत, सुपारी और सिक्के डालें। साथ ही आम के पत्ते रखकर उस पर नारियल भी रखें। यह सब कलश स्थापित करने से पहले करें।

फिर चौकी पर पान के पत्ते रखें। इस पर अक्षत भी रखें। फिर भगवान गणेश, भगवान शिव और माता पार्वती को स्नान कराएं।

अब उनके आगे घी का दीपक और धूप जलाएं। फिर गणेश जी और माता पार्वती को कुमकुम का तिलक और शिव शंकर को चंदन का तिलक लगाएं।

तिलक करने के बाद फूल व माला चढ़ाएं। शिव जी सफेद फूल अर्पित करें।

भगवान गणेश को दूर्वा चढ़ाएं। शिव जी को बेलपत्र, धतूरा, भांग और शमी के पत्ते अर्पित करें।

गणेश जी और माता पार्वती को पीले चावल अर्पित करें। शिव जी को सफेद चावल अर्पित करें।

सभी भगवानों को कलावा चढ़ाएं। फिर गणेश जी और भगवान शिव को जनेऊ अर्पित करें।

माता पार्वती को श्रृंगार की वस्तुएं अर्पित करें।

सभी को फल अर्पित करें।

इसके बाद हरतालिक तीज की कथा पढ़ें या सुनें।

भगवान गणेश, भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें। फिर मिठाई अर्पित करें और हाथ जोड़कर प्रणाम करें।

यह भी पढ़ें-हरतालिका तीज: 21 अगस्त को है हरतालिका तीज, जानें पूजा का मुहूर्त

हरतालिका व्रत की कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, पार्वती जी के पिता को शिवजी का रहन-सहन और उनकी वेशभूषा बिल्कुल पसंद नहीं थी। उसी समय नारद जी से उनके पास आए और उन्होंने राजा के सामने विष्णु जी और पार्वती जी के विवाह का प्रस्ताव रखा। पार्वती जी के पिता इस विवाह के लिए तुरंत मान गए। लेकिन माता पार्वती मन ही मन भगवान शिव को अपना पति मान चुकी थीं। विष्णु जी से उन्हेने विवाह करने से मना कर दिया। माता पार्वती की सखियों ने उनका अपहरण कर जंगल ले गईं।



जंगल में शिव को पति के रूप में पाने के लिए पार्वती जी ने कठोर तपस्या की। शिवजी ने प्रन्न होकर उन्हें दर्शन दिए और माता पार्वती के वर मांगने पर उन्होंने पार्वती जी को पत्नी के रूप में अपना लिया। आखिर में उनके पिता भी इस विवाह के लिए मान गए।

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By Shweta August 20, 2020 3 min read
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