अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अब सिर्फ तीन दिन शेष हैं. रिलीजन वर्ल्ड आपके लिए लेकर आया है आधुनिक योगियों के परिचय की अंतिम सीरीज़. इस सीरीज में हम आपका परिचय कराएँगे बीकेएस अयंगर से लेकर योग गुरु भारत भूषण तक तो चलिए शुरू करते हैं अपनी अंतिम सीरीज-
बीकेएस अयंगर

बीकेएस अयंगर, एक योगी जिसने धीरे-धीरे बढ़ते हुए अपने जादू से पूरी दुनियाको प्रभावित किया. उनके ‘ब्रांडेड’ योग को न केवल अमेरिका में स्वीकार किया गया, बल्कि उसे बतौर ‘क्रिया’ ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी में भी जगह दी गई.
अयंगर का योग बेहद सरल है. उनके योग के मुख्य रूप से चार तत्व हैं: परिशुद्धि, एकत्रीकरण, अनुक्रमण, समय और योग में इस्तेमाल होने वाले उपकरण और चीजें. 200 तरह के आसन और 14 प्रकार के प्राणायाम उनके योग के तहत आते हैं, जिनसे लचीलापन, ध्यान और संतुलन विकसित करने में मदद मिलती है.
तिरुमलाई कृष्णमचार्य के शिष्य बीकेएस अयंगर ही वे योग गुरु थे जो योग को भारत से निकालकर पूरी दुनिया में ले गए। इन्होंने पतंजलि के योग सूत्रों को पुनः परिभाषित किया और दुनिया को ‘अयंगर योग’ का तोहफा दिया।
वे 95 साल की उम्र में योग करते थे। खास बात ये है कि अयंगर ने 60 के दशक में ही पश्चिमी देशों में योग को प्रसारित करने का काम किया था. उनकी किताब ‘लाइट ऑन योगा’ पहली बार 1996 में आई.
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बिक्रम चौधरी
बिक्रम चौधरी ने लोगों को आधुनिक तरीके से योग सिखाया। 70 वर्षीय भारतीय अमेरिकी बिक्रम चौधरी ‘बिक्रम योग’ के संस्थापक हैं। वे पूरी दुनिया में हॉट योग गुरु के नाम से मशहूर हैं।
220 देशों में उनके खोले 720 योग स्कूल हैं, जहां बिक्रम योग सिखाया जाता है। दर्जनों स्कूल सिर्फ ब्रिटेन में मौजूद हैं।
उनके फॉलोअर्स में मैडोना, डेमी मूर, बिल क्लिंटन की बेटी चेल्सी क्लिंटन और जॉर्ज क्लूनी जैसे कई हॉलीवुड, खेल और पॉलिटिक्स की दुनिया के हाई प्रोफाइल सेलिब्रिटीज शामिल रहे।
बिक्रम चौधरी अपने फॉलोअर्स को 40 डिग्री सेल्सियस तापमान में योग सिखाते हैं। इसे वह ‘हॉट योग’ का नाम देते हैं।उनके वर्ल्डवाइड 700 से ज्यादा स्टूडियो में हजारों की संख्या में फॉलोअर्स हैं।
श्रीश्री रविशंकर

दुनियाभर में ‘ऑर्ट ऑफ लिविंग’ के माध्यम से प्रख्यात हुए श्रीश्री रविशंकर का जन्म 1956 में एक तमिल अय्यर परिवार में हुआ।
1981 में श्रीश्री फाउंडेशन के तहत उन्होंने ‘ऑर्ट ऑफ लिविंग’ नामक शिक्षा की शुरुआत की। आज फाउंडेशन लगभग 140 देश में सक्रिय है।
इस फाऊंडेशन ने दुनियाभर के लाखों लोगों को जीवन जीने की कला सीखाई है। योग के सातवें अंग ध्यान की सुदर्शन क्रिया और आत्म विकास के इस शैक्षणिक कार्यक्रम से प्रेरित होकर लाखों लोगों ने कुंठा, हिंसा और अपनी बुरी आदतें छोड़ दी है।
बाबा रामदेव
बाबा रामदेव ऊर्फ रामकृष्ण यादव का जन्म 1965 को हरियाणा में हुआ। नौ अप्रैल 1995 को रामनवमी के दिन संन्यास लेने के बाद वे आचार्य रामदेव से स्वामी रामदेव बन गए। प्रारंभ में दिव्य योग मंदिर ट्रस्ट की स्थापना की।
बाद में योग और आयुर्वेद के प्रचार-प्रसार के लिए पतंजलि योग पीठ की स्थापना की। छह अगस्त 2006 को इसका उद्घाटन किया गया। योग और आयुर्वेद का यह दुनिया का सबसे बढ़ा केंद्र माना जाता है।
बाबा रामदेव के कारण योग को पूरी दुनिया में सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। बाबा ने दुनियाभर की यात्रा कर वहां योग शिविर लगाएं हैं। देश के कई स्थानों पर योग शिविर का उन्होंने सफलतम आयोजन कर लाखों लोगों को स्वास्थ्य लाभ दिया है।
जग्गी वासुदेव
भारत ही नहीं विश्व भर में प्रसिद्ध सद्गुरु जग्गी वासुदेव एक योगी, रहस्यवादी, लेखक, कवि , दिव्यदर्शी और अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वक्ता हैं.
इनके दुनिया भर में कई संख्या में फॉलोअर्स मौजूद हैं. सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने ईशा फाउंडेशन नाम की संस्था की स्थापना की है.
ईशा फाउंडेशन भारत समेत संयुक्त राज्य अमेरिका, इंग्लॅण्ड, लेबनान, सिंगापुर और ऑस्ट्रेलिया में योग सिखाता है. सद्गुरु ने आठ भाषाओँ में 100 से भी अधिक पुस्तकों की रचना की है.
11 साल की उम्र में जग्गी वासुदेव ने योग करना आरम्भ कर दिया था. इन्हें योग की शिक्षा श्री राघवेन्द्र राव से मिली.
आदि योगी भगवान शिव की जिस आदमकद मूर्ति का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उद्घाटन किया था उसका निर्माण जग्गी वासुदेव की ओर से ही करवाया गया।
योगी, दिव्य पुरुष, सदगुरु जग्गी वासुदेव अध्यात्म की दुनिया में अपना एक विशिष्ट स्थान रखते हैं। इनका जीवन गंभीरता और व्यवहारिकता एक आकर्षक मेल है, अपने कार्यों के जरिए इन्होंने योगा को एक गूढ़ विद्या नहीं बल्कि समकालीन विद्या के तौर पर दर्शाया।
सदगुरु जग्गी वासुदेव को मानवाधिकार, व्यापारिक मूल्य, सामाजिक-पर्यावरणीय मसलों पर अपने विचार रखने के लिए वैश्विक स्तर पर आमंत्रित किया जाता है।
योग गुरु भारत भूषण
योग गुरु भारत भूषण एक भारतीय योग शिक्षक हैं। गृहस्थ धर्म का पालन करते हुए उन्होंने पूर्णत: सन्यस्त भाव से देश-विदेश में योग को प्रचारित और प्रसारित करने का उल्लेखनीय कार्य किया। भारत सरकार ने सन 1991 में उन्हें पद्म श्री की उपाधि से अलंकृत किया।
योग एवं शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रपति से पद्म श्री सम्मान प्राप्त करने वाले वे प्रथम भारतीय हैं। योग के साथ-साथ बॉडी बिल्डिंग में भी उन्हें भारतश्री का अतिविशिष्ट सम्मान मिल चुका है।
उनका ऐसा मानना है कि योग में ही समस्त मनुष्य जाति की शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय समस्याओं का एकमात्र समाधान निहित है।
महज़ 20 बरस से भी कम आयु में सन् 1971 में अपने घर पर ही मोक्षायतन अन्तर्राष्ट्रीय योगाश्रम की नींव डाली। इसी प्रतिष्ठान के बैनर तले उन्होंने अपनी पुत्री प्रतिष्ठा के साथ देश के कई शहरों में योग-शिविर लगाकर आम आदमी को योग के प्रति जागरुक करने का उद्योग किया।
देशी-विदेशी शिष्यों के बीच योग की लोकप्रियता में अपनी गहरी पैठ बनाते हुए शीघ्र ही योग गुरु के रूप में विख्यात हो गये। सन् 1978 से उन्होंने विभिन्न टीवी चैनेलों पर भी अपने कार्यक्रम देने प्रारम्भ कर दिये।
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