RELIGION WORLD — THE INDEPENDENT SCIENTIFIC & INTERFAITH JOURNAL
Navigation

© 2026 Religion World Foundation.

Global Faith • Scientific Heritage • Human Ethics

ज्योतिर्मठ बद्रीकाश्रम के शंकराचार्य के उत्तराधिकारी के विषय में प्रेस विज्ञप्ति

ज्योतिर्मठ बद्रीकाश्रम के शंकराचार्य के उत्तराधिकारी के विषय में प्रेस विज्ञप्ति

ज्योतिर्मठ बद्रीकाश्रम के शंकराचार्य के उत्तराधिकारी के विषय में प्रेस विज्ञप्ति
Visual Archive

ज्योतिर्मठ बद्रीकाश्रम के शंकराचार्य के उत्तराधिकारी के विषय में प्रेस विज्ञप्ति

प्रेस विज्ञप्ति

स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के निर्देशन पर ज्योतिर्मठ बद्रीकाश्रम के शंकराचार्य के रूप में स्वामीश्री अविमुक्तेश्वरानंद के कार्यभार संभालने के समाचार दिनाँक —- फेसबुक पर प्रकाशित समाचार वस्तुतः प्रत्यक्ष रूप से गलत है और दिनांक 27.08.2020 को माननीय सर्वोच्च न्यायलय के द्वारा पारित आदेश का उल्लंघन है।

ज्योतिर्मठ बद्रीकाश्रम के शंकराचार्य के उत्तराधिकारी के विषय में भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष विवाद लंबित है। 27.08.2020 को भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने यह निर्देश देते हुए कहा था कि अंतरिम आदेश अपील के निपटारे तक जारी रहेगा।

शब्द अंतरिम आदेश मुकदमेबाजी के दौरान न्यायालय द्वारा जारी एक आदेश को संदर्भित करता है। यह आम तौर पर यथास्थिति सुनिश्चित करने के लिए न्यायालय द्वारा जारी किया जाता है।

स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती को बद्रीकाश्रम के शंकराचार्य के रूप में कभी स्थापित नहीं किया गया था। दिनांक 07.12.73 को ज्योतिर्मठ बद्रीकाश्रम के शंकराचार्य के रूप में स्थापित होने के उनके दावे को माननीय उच्च न्यायालय ने दिनांक 22.09.2017 को 2015 की प्रथम अपील संख्या 309 में खारिज कर दिया। स्वामी स्वरूपानंद ने भी भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष एक एस एल पी दायर किया है।

एक व्यक्ति जो कभी ज्योतिर्मठ बद्रीकाश्रम के शंकराचार्य के रूप में स्थापित नहीं किया गया था, वह कभी भी शंकराचार्य के प्रभार को नए अवलंबी को नहीं सौंप सकता है। ज्योतिष्पीठ बद्रीकाश्रम के शंकराचार्य के दायित्व  को स्वामीश्री अविमुक्तेश्वरानंद को सौंपकर, स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने भारत के सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का उल्लंघन किया है और सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का उल्लंघन करने के लिए न्यायालय के कोप का भाजन बनेंगे ।

स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती और स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के बीच यह विवाद लम्बे समय से लंबित है। माननीय न्यायलय का अंतरिम आदेश स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती को यह अधिकार नहीं देता है कि वे किसी को भी ज्योतिर्मठ बद्रीकाश्रम के शंकराचार्य का पदभार संभालने और तीसरे पक्ष को अधिकार बनाने के लिए कहें।

यह ध्यान देने की बात है कि स्वामी स्वरूपानंद खुद बद्रीनाथ धाम के पट बंद होने के अवसर पर कभी उपस्थित नहीं हुए हैं। कोई व्यक्ति किसी और को अपनी ओर से एक कार्य करने के लिए कैसे अधिकृत कर सकता है, जो उसने अपने जीवन में खुद कभी नहीं किया।प्रभार सौंपने से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि स्वामी स्वरूपानंद शंकराचार्य के कार्यों का निर्वहन करने में असमर्थ हैं।

यह प्रेस विज्ञप्ति स्पष्ट करती है कि ज्योतिर्मठ बद्रीकाश्रम के शंकराचार्य के रूप में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को पदभार ग्रहण करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। स्वामी स्वरूपानंद ने अपने कदाचार से न्याय प्रशासन को शर्मिंदा किया है।

इस मामले में हम शीघ्र ही उचित कानूनी कदम उठाएंगे।

प्रवक्ता : ओंकार त्रिपाठी, एडवोकेट

नोट – इस प्रेस विज्ञप्ति को रिलीजन वर्ल्ड ज्यों का त्यों प्रकाशित कर रहा है।

RW

Editorial Review Note

Religion World is the country's only website that provides complete information on all religions. Religion World will always present information about all religions impartially. You can send us all kinds of information, news, updates, opinions, and suggestions at religionworldin@gmail.com.You can also follow us on X (Twitter), Facebook, and YouTube.

By Religion World November 23, 2020 3 min read
Share: