जानिए कैसे मनाते हैं करवाचौथ का त्योहार?
- 2019 में करवा चौथ पर 4 अद्भुत संयोग पड़ रहे हैं
- करवाचौथ और गणेश चतुर्थी एक साथ
- करवाचौथ पर रोहिणी नक्षत्र के साथ मंगल का योग करवाचौथ को बना रहा है अधिक मंगलकारी
करवा चौथ की तैयारियां कई दिन पहले से शुरू हो जाती हैं। सुहागिन महिलाएं कपड़े, गहने, श्रृंगार का सामान और पूजा सामग्री खरीदती हैं। करवा चौथ वाले दिन महिलाएं सूर्योदय से पहले सरगी खाती हैं. इसके बाद सुबह हाथ और पैरों पर मेहंदी लगाई जाती है और पूजा की थालियों को सजाया जाता है। व्रत करने वाली आस-पड़ोस की महिलाएं शाम ढलने से पहले किसी मंदिर, घर या बगीचे में इकट्ठा होती हैं. यहां सभी महिलाएं एक साथ करवा चौथ की पूजा करती हैं। इस दौरान गोबर और पीली मिट्टी से पार्वती जी की प्रतिमा स्थापित की जाती है। आज कल माता गौरी की पहले से तैयार प्रतिमा को भी रख दिया जाता है। विधि-विधान से पूजा करने के बाद सभी महिलाएं किसी बुजुर्ग महिला से करवा चौथ की कथा सुनती हैं। इस दौरान सभी महिलाएं लाल जोड़े में पूरे सोलह श्रृंगार के साथ पूजा करती हैं। चंद्रमा के उदय पर अर्घ्य दिया जाता है और पति की आरती उतारी जाती है। पति के हाथों पानी पीकर महिलाओं के उपवास का समापन हो जाता है।
करवाचौथ और गणेश चतुर्थी एक साथ
इस वर्ष (2019) का करवाचौथ एवम गणेश चतुर्थी एक साथ होने से 17 अक्टूबर का दिन और भी विशेष हो गया है। करवा चौथ का व्रत पति की लंबी आयु के लिए सुहागिन महिलाओं द्वारा किया जाता है। इसके अलावा महिलाएं माता करवा की विधिवत पूजन करते हैं। करवा चौथ को देश के अन्य भागों में करक चतुर्थी के नाम से भी पुकारा जाता है। करवा यानि मिट्टी का एक प्रकार का बर्तन होता है जिसके द्वारा चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है। अर्घ्य से मतलब चंद्रमा को जल देने से है। करवा चौथ की पूजा के दौरान करवा आवश्यक पूजन सामग्री में आता है। जिसे पूजा के बाद किसी ब्राह्मण या योग्य महिला को दान स्वरूप भेंट कर दिया जाता है।इस दिन महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं। शाम को चांद का अर्ध्य कर व्रत का पारण किया जाता है। करवा चौथ के दिन माता पार्वती और गणेश जी की पूजा विधि-विधान के साथ की जाती है।
इस वर्ष 2019 में करवा चौथ पर 4 अद्भुत संयोग पड़ रहे हैं। ऐसा संयोग 70 सालों बाद बन रहा है। इस बार करवा चौथ पर रोहिणी नक्षत्र के साथ मंगल का योग होना करवा चौथ को अधिक मंगलकारी बना रहा है।
ज्योतिर्विद पण्डित दयानन्द शास्त्री जी के अनुसार रोहिणी नक्षत्र और चंद्रमा में रोहिणी का योग होने से मार्कण्डेय और सत्याभामा योग इस करवा चौथ पर बन रहा है। पहली बार करवा चौथ का व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए ये व्रत बहुत अच्छा है।
करवा चौथ का व्रत कठिन होता है क्योंकि व्रत अवधि में जल ग्रहण भी नहीं किया जाता है। शादीशुदा महिलाएं अपने पति की लंबी आयु की कामना से इस व्रत को रखतीं हैं। व्रत वाले दिन शाम के समय विवाहित महिलाएं भगवान शिव, माता पर्वती, गणेश और कार्तिकेय की विधिवत पूजा करती हैं। पूजन के बाद चंद्रमा को देखने और अर्घ्य देने के बाद ही व्रत खोलती हैं। एक साथ ही गणेश और चतुर्थी माता को भी अर्घ्य देना चाहिए।
‘मातु पिता भगिनी प्रिय भाई। प्रिय परिवारु सुहरद समुदाई॥
सासु ससुर गुर सजन सहाई। सुत सुंदर सुसील सुखदाई॥
जहं लगि नाथ नेह अरु नाते पिय बिनु तियहि तरनिहु ते ताते। तनु धनु धामु धरनि पुर राजू। पति बिहीन सबु सोक समाजू॥’
जानिए करवा चौथ व्रत की पूजन सामग्री
17 अक्टूबर को करवा चौथ की पूजा है। इससे पहले आज आपको पूजा थाली में क्या जरूरी सामग्रियां होनी चाहिए, इसकी पूरी तैयारी करनी है। आज ही इन सभी सामान को जुटा कर रख लेना है। वैसे तो करवा चौथ के व्रत से एक-दो दिन पहले ही सारी पूजन सामग्री को इकट्ठा करके घर के मंदिर में रख देना चाहिए। पूजन सामग्री इस प्रकार है-
1. छलनी
2. मिट्टी का टोंटीदार करवा और ढक्कन
3. सिंदूर
4. फूल
5. करवा चौथ की थाली
6. दीपक
7. मेवे
8. फल
9. रूई की बत्ती
10. मीठी मठ्ठियां
11. मिठाई
12. कांस की तीलियां
13. करवा चौथ कैलेंडर
14. नमकीन मठ्ठियां
15. रोली और अक्षत (साबुत चावल)
16. आटे का दीया
17. फूल
18. धूप या अगरबत्ती
19. चीनी का करवा
20. पानी का तांबा या स्टील का लोटा
21. गंगाजल
22. चंदन और कुमकुम
23. कच्चा दूध, दही रऔ देसी घी
24. शहद और चीनी
25. गौरी बनाने के लिए पीली मिट्टी
26. लकड़ी का आसन
27. आठ पूरियों की अठावरी और हलवा
28. दक्षिणा
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