महामण्डलेश्वर स्वामी श्याम सुन्दर दास जी महाराज को भावभीनी श्रद्धंजलि
- परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, महामण्डलेश्वर स्वामी अवधेशानन्द जी महाराज, महामण्डलेश्वर हरिचेतनानन्द जी महाराज, योगगुरू स्वामी रामदेव जी महाराज, शहरी विकास मंत्री श्री मदन कौशिक जी और अनेक अखाड़ों के पूज्य महामण्डलेश्वर और मंहतों ने अर्पित की श्रद्धांजलि
- पूज्य संतों ने भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी को उनकी प्रथम पुन्यतिथि पर किया याद और श्रद्धा सुमन भेंट किये
- कुम्भ मेला से पहले गंगा के तट पर बनाया जाना चाहिये संत समाधि स्थल
- गंगा के तट पर बने संत स्मृति उपवन
- संतों को जल समाधि नहीं बल्कि भू समाधि या अग्नि संस्कार हो – स्वामी चिदानन्द सरस्वती
ऋषिकेश, 16 अगस्त। पूज्य संतों ने महामण्डलेश्वर स्वामी श्याम सुन्दर दास जी महाराज को भण्डारा के अवसर पर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
महामण्डलेेश्वर स्वामी श्याम सुन्दर दास जी महाराज संत जगत के बहुत ही मूर्धन्य महापुरूष, परम विन्र्रम, विद्वान, सात्विक तथा भारतीय और आध्यात्मिक संस्कृति के सजग प्रहरी थे। ऐसे पूज्य संतों का हमारे बीच से चले जाना संत समाज के लिये एक बहुत बड़ी क्षति है।

पूज्य महामण्डलेश्वर स्वामी श्याम सुन्दरदास जी महाराज को परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, महामण्डलेश्वर स्वामी अवधेशानन्द जी महाराज, महामण्डलेश्वर हरिचेतनानन्द जी महाराज, योगगुरू स्वामी रामदेव जी महाराज, स्वामी ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी जी महाराज, मंहत ऋषिश्वरानन्द जी महाराज, स्वामी सत्पाल ब्रह्मचारी जी महाराज, स्वामी विवेकानन्द जी महाराज, शहरी विकास मंत्री श्री मदन कौशिक जी और अनेक अखाड़ों के पूज्य महामण्डलेश्वरों ने भण्डारा के पावन अवसर पर भावभीनी श्रद्धांजलि भेंट की।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि अब समय आ गया है कि पूज्य संतों के लिये माँ गंगा के तट पर समाधि स्थल बने। मेरा मानना है कि अब जल समाधि नहीं दी जानी चाहिये बल्कि गंगा के पावन तट पर बने समाधि स्थल पर समाधि दी जानी चाहिये या अग्नि संस्कार हो। समाधि स्थल को संत स्मृति उपवन के रूप में निर्मित किया जाना चाहिये। कुम्भ मेला और अन्य स्नान तिथियों पर श्रद्धालु गंगा स्नान करने आये तो इस संत स्मृति उपवन में आकर श्रेष्ठ संकल्प लें तथा यह समाधि स्थल एक छायादार रमणीय स्थल बने।
स्वामी जी महाराज ने कहा कि वर्ष 2021 में हरिद्वार में कुम्भ आने वाला है। इस कुम्भ को ग्रीन और क्लीन बनाने के लिये हमें अभी से प्रयास करना होगा। उन्होने बताया कि आादरणीय मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत जी का भी यही प्रयास है कि आगामी कुम्भ क्लीन और ग्रीन हो, परन्तु इसकी शरूआत संत समुदाय के माध्यम से होगी तो लोगों में इसका संदेश स्थायी रहेगा और दूर तक जायेगा।

स्वामी जी महाराज ने कहा कि हमें अपने प्रत्येक पर्व और त्योहारों को हरित त्योहार के रूप में मनाना चाहिये। त्योहारों के माध्यम से दिया गया हरियाली संवर्द्धन का संदेश भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व को प्रभावित करेंगा।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने आज भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की प्रथम पुण्यतिथि पर उन्हें याद करते हुये कहा कि हमेशा युवा रहने वाले, युवाओं के पथ प्रदर्शक और अद्भुत राजनीतिक सूझबूझ के धनी थे वाजपेयी जी। उन्होने कहा कि एक कवि हृदय ही माँ भारती का दर्द समझ सकता था और वही दर्द वाजपेयी जी ने अनेक बार अपनी कविताओं के माध्यम से व्यक्त किया था। सभी पूज्य संतों ने माँ धरती के इस सच्चे सपुत को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
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