महर्षि संस्थान द्वारा 9000 स्थायी विश्व शांति साधकों के समूह का गठन किया जायेगा: ब्रह्मचारी गिरीश
भारत में महर्षि शैक्षणिक संस्थानों के अध्यक्ष ब्रह्मचारी गिरीश जी ने बतलाया कि आज विश्व में कोरोना वायरस नामक ऐसे अदृश्य शत्रु के नाम से हाहाकार मचा है जिससे लड़ने के लिये किसी को कोई शस्त्र, औषधी या उपाय नहीं सूझ रहा है, उसके विरुद्ध तथाकथित महाशक्तियों के हौसले पस्त होते दिख रहे हैं, तब भारतीय शाश्वत वैदिक ज्ञान परम्परा में ही इससे से निपटने का उपाय है। इस अदृश्य, अव्यक्त को हराने का उपाय भी अदृश्य, अव्यक्त, निराकार चेतना के स्तर पर ही प्राप्त होगा। वैदिक समय से और आधुनिक विज्ञान से हमें ज्ञात है कि सारा प्रकट संसार अव्यक्त का ही प्राकट्य है। जब व्यक्त के स्तर पर कोई उपाय न हो तो समझ लेना चाहिये कि वह उपाय अव्यक्त में है।


उन्होंने आगे बतलाया कि “विश्व के महानतम् चेतना वैज्ञानिक परम पूज्य महर्षि महेश योगी जी ने हमें अनेकों बार याद दिलाया था कि उपनिषद् का “हेयम दुःखम् अनागतम” का सिद्धाँत, प्रिवेंशन का सिद्धाँत है। महर्षि जी ने सम्पूर्ण विश्व को भावातीत ध्यान, सिद्धि कार्यक्रम, यौगिक उड़ान तथा वैदिक ज्ञान-विज्ञान व चेतना की कई उन्नत तकनीकें प्रदान की हैं। इनके नियमित अभ्यास से अभ्यासकर्ता को प्राप्त होने वाले कई शारीरिक एवं मानसिक लाभों के अतिरिक्त वैज्ञानिकों ने यह सिद्ध किया कि यदि विश्व की जनसंख्या के एक प्रतिशत के वर्गमूल की संख्या के बराबर के व्यक्ति समूह में यौगिक उड़ान सहित भावातीत ध्यान-सिद्धि कार्यक्रम का अभ्यास प्रतिदिन दो बार नियमित रूप से करते हैं तो न केवल सामूहिक चेतना में सकारात्मकता की वृद्धि होती है वरन उसके साथ ही साथ समाज की सामूहिक चेतना में सामन्जस्यता तथा अनुकूलता में हुई अभिवृद्धि से नकारात्मक सोच व प्रवृत्तियों का शमन होने लगता है। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसा कि प्रकाश के आते ही बिना किसी प्रयास के अंधेरा मिटने लगता है।”

अपनी भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डालते हुये ब्रह्मचारी गिरीश जी ने कहा कि ‘विश्व की वर्तमान जनसंख्या लगभग 700 करोड़ है। इसका एक प्रतिशत 7 करोड़ होता है तथा उसका वर्गमूल लगभग 9,000 है। विश्व की तनाव से पूर्ण रूप से ग्रस्त अवस्था को देखते हुये तथा विश्व के समस्त नागरिकों के चिरजीवी सुख व शांति, समृद्धता, पूर्ण स्वास्थ्य, प्रकृति में संतुलन एवं प्रबुद्धता, तथा समस्त राष्ट्रों को अजेयता प्रदान करने हेतु, महर्षि संस्थानों ने मध्यप्रदेश में जबलपुर के निकट स्थित भारत के भौगोलिक केन्द्र ब्रह्मस्थान में ‘9,000 स्थायी विश्व शांति साधकों का एक समूह’ स्थापित करने का निर्णय लिया है। इस समूह के द्वारा निर्मित सतोगुण उन दुष्प्रभावों को पहले रोकने व बाद में समाप्त करने में सहायक होगा जो रजोगुण तथा तमोगुण द्वारा उत्पादित होते हैं। साथ ही यह समूह सभी राज्यों तथा केन्द्र की सरकारों को ‘समस्या विहीन व निवारक सिद्धांत आधारित प्रशासन’ से शासन करने में भी सहायता प्रदान करेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि ‘‘भारत में हम लोग लगभग 130 करोड़ हैं और हमें तो केवल 9,000 चाहिये जो इस पवित्र कार्य को संपादित करने के लिये अत्यंत कम संख्या है। वे भारतीय नागरिक जिनकी आयु 21 से 65 वर्ष के मध्य है तथा जो शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ हैं, इस समूह के सदस्य हो सकते हैं। ब्रह्मचारी जी ने सभी समर्थ भारतीयों को संपूर्ण विश्व परिवार के कल्याण हेतु आयोजित इस महायज्ञ में भाग लेने एवं सहायता करने के लिये आमंत्रित किया है। उन्होंने सभी सक्षम नागरिकों तथा संस्थाओं को भी इस पवित्र कार्य को पूर्णता प्रदान करने का आमंत्रण दिया है। यदि सभी परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो यह ‘साधक समूह’ श्री गुरु पूर्णिमा के पवित्र दिवस 5 जुलाई 2020 से कार्य करना प्रारंभ करेगा।
संस्था ने किसी भी जानकारी प्राप्त करने हेतु ईमेल wp9000info@mssmail.org तथा मोबाईल क्रमांक 9425008470 भी उल्लेखित किया है।
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