माघ महीने की अमावस्या को मौनी अमावस्या कहा जाता है. इस दिन पवित्र नदियों में स्नान कर भगवान विष्णु और शिव जी को पूजा जाता है. इस बार मौनी अमावस्या कुंभ मेले की वजह से और भी खास होने वाली है.
इस बार मौनी अमावस्या 11 फरवरी को है. इस मास को कार्तिक मास के जैसे ही पुण्य महीना माना गया है. इसी वजह से गंगा किनारे लाखों श्रद्धालु डुबकी लगाते हैं.
यहां जानिए क्या है मौनी अमावस्या की पूजा-विधि, व्रत के नियम और महत्व.
मौनी अमावस्या 2021 का शुभ मुहूर्त
मौनी अमावस्या 11 फरवरी बृहस्पतिवार को है.
मौनी अमावस्या शुभ मुहूर्त शुरू – 10 फरवरी रात 01 बजकर 08 मिनट से
मौनी अमावस्या शुभ मुहूर्त खत्म – 11 फरवरी रात 12 बजकर 35 मिनट तक
मौनी अमावस्या का महत्व
माघ माह की इस अमावस्या में गंगा स्नान बहुत महत्व है. मान्यता है कि इस दिन गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों में देवताओं का निवास होता है.
खासकर कुंभ के दौरान मौनी अमावस्या के दिन लाखों की संख्या में तीर्थयात्री आते हैं. कुंभ के दौरान सोमवार के दिन पड़ने वाले शाही स्नान बेहद ही शुभ माने जाते हैं. इसके साथ ही यह भी मान्यता है कि पूरे मन से इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाए तो आयु लंबी होती है.
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पूजा-विधि
सबसे पहले गंगा में स्नान करें. घर में हो तो पानी में गंगाजल डालकर स्नान करें.
विष्णु जी का ध्यान करें और व्रत का संकल्प लें.
विष्णु जी की रोज़ाना की तरह पूजा कर तुलसी की 108 बार परिक्रमा लें.
पूजा के बाद दान दें. अन्न, वस्त्र या धन को दान में दें.
सुबह स्नान से ही मौन रहें.
इस मंत्र का जाप करते रहें-
गंगे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति। नर्मदे सिन्धु कावेरि जलऽस्मिन्सन्निधिं कुरु।।
मौनी अमावस्या के दिन क्यों रहा जाता है मौन ?
मान्यता है कि मन को शांत रखने के लिए माघ महीने की इस अमावस्या के दिन मौन रहा जाता है. ठीक उसी प्रकार जैसे लोग भगवान को शांत रहकर याद करते हैं. ऐसा करने से मन शांत रहता है और बुरे ख्याल दूर रहते हैं. अगर कोई व्यक्ति शांत ना रह पाए तो इस दिन किसी को बुरा-भला ना बोले, इस परिस्थिती में भी यह व्रत पूरा माना जाता है.
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