रामकथा वाचक मोरारी बापू गुस्से में हैं…
रामकथा वाचक मोरारी बापू गुस्से में हैं। उनका गु्स्सा बिहार के बेगुसराय के सिमरिया में हो रही रामकथा में फूट पड़ा। वे राम कथा के मंच पर ही एक प्रसंग को लेकर नाराजगी में थे। जो मोरारी बापू की कथा के जानने सुनने वाले हैं वे जानते होंगे कि वे हनुमान के परम भक्त है और उनके रामकथा के मंच पर हनुमान जी की छवि होती है। इसके अलावा उनके गांव तलगाजरडा में भी उन्होंने हनुमान की विशाल मूर्ति लगा रखी है।

हाल ही में योगी आदित्यनाथ ने हनुमान पर एक बयान दिया है। योगी मे राजस्थान में चुनाव प्रचार के दौरान हनुमान को दलित बता दिया। अलवर जिले के मालाखेड़ा में एक सभा को संबोधित करते हुए योगी आदित्यनाथ ने बजरंगबली को दलित, वनवासी, गिरवासी और वंचित करार दिया। योगी ने कहा कि बजरंगबली एक ऐसे लोक देवता हैं जो स्वयं वनवासी हैं, गिर वासी हैं, दलित हैं और वंचित हैं। इसे लेकर उनकी कड़ी आलोचना शुरू हो गई। बीजेपी के कई सांसदों ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया। केन्द्र सरकार में मंत्री सत्यपाल सिंह का कहना है कि हनुमन जी आर्य थे. केंद्रीय मंत्री सत्यपाल मलिक ने कहा कि भगवान राम और हनुमान जी के युग में कोई जाति व्यवस्था नहीं थी. इसलिए हनुमान जी आर्य थे। वहीं भाजपा सांसद सावित्री बाई फुले ने पार्टी ही छोड़ दी।

हनुमान को राजनैतिक लाभ के लिए अपने बयानों से दलित और वंचित बताने पर मोरारी बापू नाराज हैं। मोरारी बापू ने आक्रामक लहजे में कहा, “आज पूरे देश में जाति-पाति की चर्चा की जा रही हैं, बंद करो जाति-पाति की चर्चा करना। तुम अपने निहित स्वार्थ के लिए ऐसे-तैसे निवेदन करते हो जिससे हिंदुस्तान का नुकसान हो रहा है। हम जोड़ने में पड़े हैं तुम तोड़ने में पड़े हो। हनुमानप्राण वायु है। कौन माई का लाल हनुमानको जाति-पाति में बांट सकेगा। इस प्रकार की बयानबाजी का नुकसान देश को शताब्दी तक होता है। (तंज कसते हुए कहा ) इस राज को क्या जाने साहिल के तमाशाई, हमें डूब कर जाना है सागर तेरी गहराई। जाति न पूछो साधु की, पूछ लीजिये ज्ञान, मोल करो तलवार का, पड़ा रहन दो म्यान। हनुमानजी साधु ही नहीं साधु संत के रखवारे हैं”।
सुनिए मोरारी बापू ने कैसे इस विषय पर अपनी नाराजगी जताई…
योगी आदित्यनाथ के इस बयान के बाद दलितों के एक समूह ने मुजफ्फरगनर के एक हनुमान मंदिर से पुजारी को हटाकर एक दलित पुजारी की नियुक्ति कर दी थी। जाहिर है योगी के इस बयान को लेकर समाज में गलत संदेश गया और कई वर्गों ने इसे अपने तरीके से इस्तेमाल करने की कोशिश की।
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