परमार्थ निकेतन आश्रम में आज मोतियाबिन्द नेत्र चिकित्सा शिविर का विधिवत उद्घाटन

- स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने नेत्र चिकित्सकों को जल संरक्षण का कराया संकल्प
- शुकदेवानन्द धर्मार्थ अस्पताल में अभी तक 700 मोतियाबिन्द के रोगियों ने करवाया पंजीयन
- विश्वविख्यात आस्ट्रेलिया, अमेरिका, यूके और भारत के नेत्ररोग विशेषज्ञों ने अभी तक 250 से अधिक मोतियाबिन्द के सफल आपरेशन किये
- पीडित मानवता की सेवा करना ही सच्ची साधना -स्वामी चिदानन्द सरस्वती
ऋषिकेश, 27 नवम्बर। परमार्थ निकेतन आश्रम द्वारा संचालित स्वामी शुकदेवानन्द धर्मार्थ चिकित्सालय में 20 नवम्बर से 30 नवम्बर तक चलने वाले 11 दिवसीय मोतियाबिन्द नेत्र रोग चिकित्सा शिविर का विधिवत उद्घाटन परमार्थ निकेेतन आश्रम के परमाध्यक्ष, स्वामी चिदानन्द सरस्वतीे जी महाराज ने अपनी विदेश यात्रा से वापस आने के बाद आज किया इस अवसर पर विश्व विख्यात नेत्र रोग विशेषज्ञ भी उपस्थित थे। स्वामी जी महाराज, जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती जीे और नेत्र चिकित्सकों ने दीप प्रज्जवलित किया तथा विश्व स्तर पर स्वच्छ जल की आपूर्ति हेतु विश्व ग्लोब का जलाभिषेक किया। साथ ही स्वामी जी ने सभी को जल संरक्षण का संकल्प कराया। स्वामी जी महाराज ने बताया कि स्वच्छ जल के अभाव में अनेक जल जनित बीमारियां होती है। स्वच्छ जल और शुद्ध वायु के बिना स्वस्थ जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। उन्होने कहा कि प्रदूषण में कमी के लिये अपशिष्ट पदार्थोे को रीसाइकल करना एवं पुनः उपयोग करना अच्छा तरीका है। डाॅक्टर और शिक्षा जगत से जुड़े लोग सीधे जनता के संपर्क में आते है अतः उन्हे बेहतर पर्यावरण के निर्माण में भागीदारी के लिये प्रेरित किया जाना हमारा कर्तव्य है।

आस्ट्रेलिया से आयी नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ पूर्णिमा राय के नेतृत्व में 22 सदस्सीय चिकित्सकों का दल परमार्थ निकेतन ऋषिकेश आया हुआ है। डाॅ राय ने बताया कि स्वामी जी महाराज की प्रेरणा और संरक्षण में 16 वर्षो से निःशुल्क मोतियाबिन्द का आपरेशन कर पीड़ित मानवता की सेवा की जा रही है। स्वामी चिदानन्द सरस्वतीे जी महाराज ने कहा, ’पीडित मानवता की सेवा करना ही सच्ची साधना है सच्चे अर्थो में सेवा है। निःस्वार्थ सेवा ही मानव को मानव से जोड़ती है। स्वामी जी महाराज ने बताया कि जल का संरक्षण; लोगों को स्वच्छ जल उपलब्ध कराना, पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र को दूषित न करना भी ईश्वर की सेवा है।
चिकित्सा शिविर की प्रमुख डॉ पूर्णिमा राय ने कहा, ’परमार्थ निकेतन आश्रम में आकर पूज्य स्वामी जी का सान्निध्य और माँ गंगा का पावन तट मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है तथा स्वामी जी महाराज के मार्गदर्शन से ही सत्कर्मो के सम्पादन का ज्ञान प्राप्त हुआ। उन्होने कहा कि परमार्थ निकेतन में आकर सेवा और साधना एक साथ पूर्ण हो जाती है।’ इसके लिये उन्होने मुक्त कंठ से पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी का साधुवाद किया।

नेत्र रोग विशेषज्ञ एवं सर्जन डॉ मनोज पटेल पिटसबर्ग, अमेरीका से परमार्थ निकेतन, ऋषिकेष आये उन्होने कहा कि ’आश्रम के दिव्यता युक्त वातावरण में माँ गंगा के तट पर रोगियों की आँखों के आपरेशन करते हुये मन को अद्भुत शान्ति प्राप्त हो रही है। परमार्थ गंगा तट पर होने वाली आरती की दिव्यता ने हमें भीतर तक छू लिया है, लगता है आरती के समय अमृत बरसता है वास्तव में स्वर्गाश्रम क्षेत्र स्वर्गतुल्य है।’

स्वामी शुकदेवानन्द धर्मार्थ चिकित्सालय के चिकित्सक डॉ रवि कौशल ने बताया की शुकदेवानन्द धर्मार्थ चिकित्सालय में समय-समय पर अनेक वर्षो से लगातार मोतियाबिन्द, नजर, त्वचा, दंत, महिलाओं की चिकित्सा, हड्डी रोगों से सम्बन्धित चिकित्सा शिविर का आयोजन एवं अन्य रोगों की चिकित्सा के लिये समर्पित है। साथ ही चिकित्सकों का दल दूर-दराज के स्थानों पर जाकर चिकित्सा सहायता प्रदान करते है। उन्होने बताया कि शिविर में रोगियों को निःशुल्क चश्मंे, दवाईयाँ एवं अन्य सुविधायें निःशुल्क प्रदान की जा रही है।
चिकित्सा टीम में 20 चिकित्सक और 13 पैरा-मेडिकल स्टाफ जिसमें डाॅ पूर्णिमा राॅय, डाॅ अमरजीत संधू, डाॅ डेविड मेरफील्ड, डाॅ साइमन इरविन, डाॅ नीलिमा गंाधीम आस्ट्रेलिया से आये है। संयुक्त राज्य अमेरिका से डाॅ मनोज पटेल, यूके से डाॅ रणजीत संधू, मलेशिया से डाॅ कलाई, नेपाल से डाॅ इरीना कानस्कर, डाॅ मिलिंद भाडे, डाॅ विवेक जैन, हैदराबाद, दिल्ली और भारत के विभिन्न प्रांतों से पैरामेडिकल स्टाफ सुश्री कल्पना आस्ट्रेलिया से श्री एलिसन हर्ड, सुश्री एलिस क्राफ्ट, डेविड बटलर, रोजमेरी पोलार्ड, योला मोर्च, अमेरिका से वास्वी पटेल, मलेशिया से वजाना, श्रीमती रत्नेश, उत्तराखण्ड से श्री कुलवंत सिंह, कर्नाटक से श्री जय, श्री गुरूप्रसाद, पुणे से श्रीमती रोहिणी अथवले, डॉ राठी, श्री प्रेमराज एवं श्री प्रेमचंद्र आदि कई लोगों की टीम महत्वपूर्ण योगदान प्रदान कर रही है।
Editorial Review Note
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