नरक चतुर्दशी के पर्व का हिंदू धर्म में खास महत्व है. इस पर्व को कई और नामों से भी जाना जाता है. ये पर्व मुक्ति प्रदान करने वाला माना गया है. इस दिन यम दीपक जलाया जाता है. इसे रूप चौदस, काली चौदस, छोटी दीपावली भी कहते हैं.
क्या है नरक चतुर्दशी
इस दिन भगवान कृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस का वध किया था. इसलिए इसका नाम नरक चतुर्दशी पड़ा है. शास्त्रों के अनुसार नरकासुर नामक राक्षस ने 16,000 कन्याओं को बंधक बनाकर रखा था. भगवान कृष्ण ने नरकासुर का वध कर उन सभी कन्याओं को मुक्त करवाया.
क्या करना चाहिए इस दिन
इस दिन सुबह उठने का विशेष महत्व है. साथ ही तीर्थ स्थल पर स्नान किया जाता है. इस दिन तिल या सीसम तेल का उबटन लगाया जाता है. स्नान के बाद लोग नये कपड़े पहनते हैं, पूजन करते हैं और उसके बाद भोजन ग्रहण करते हैं. शाम को लोग घर को दीया से सजाते हैं और मिठाइयां खाते हैं.
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कब है नरक चतुर्दशी
हर साल कार्तिक मास के कृष्णपक्ष की चतुर्दशी यानी कि चौदहवें दिन नरक चतुर्दशी मनाई जाती है. इस बार 14 नवंबर को दोपहर 2:18 बजे तक नरक चतुर्दशी तिथि रहेगी. इसके बाद अमावस्या तिथि यानी दीपावली शुरू हो जाएगी.
अमावस्या तिथि 14 नवंबर दोपहर 2:17 बजे से अगले दिन यानी 15 नवंबर सुबह 10: 36 मिनट तक रहेगी.
दीपावली अमावस्या तिथि की रात को मनाई जाती है और लक्ष्मी पूजन अमावस्या की शाम को होता है. इसलिए इस साल 14 नवंबर को ही नरक चतर्दशी और महालक्ष्मी पूजन किया जाएगा.
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