परमार्थ निकेतन, डिवाइन शक्ति फाउण्डेशन और कैन प्रोटेक्ट फाउण्डेशन के संयुक्त तत्वाधान में उत्तराखण्ड राज्य की आशा कार्यकर्ताओें को महिला स्वास्थ्य, कैंसर रोकथाम और जागरूकता विषय पर दिया गया प्रशिक्षण
ऋषिकेष, 9 मार्च; अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर परमार्थ निकेतन में विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया. इसी श्रंखला में समाज के लिये ’रोल मॉडल’ महिला शक्तियों को सम्मानित किया गया. साथ ही उत्तराखण्ड राज्य की आशा कार्यकर्ताओें को महिला स्वास्थ्य, कैंसर रोकथाम और जागरूकता विषय पर “आशा की किरण’’ प्रशिक्षण कार्यशाला के माध्यम से प्रशिक्षित किया गया.
पूज्य स्वामी जी महाराज और साध्वी जी ने दीप प्रज्वलित कर ’आशा की किरण’ कार्यशाला का शुभारम्भ किया. इस अवसर पर स्वामी जी ने कहा, ’आप सभी आशा की किरण है, आप सभी अपने आप को कमत्तर न आके. उन्होने कहा, ’’आशा कि किरण’’ एक अनुष्ठान है और सभी आशा कार्यकर्तायेें उसकी आहुतियां है. स्वामी जी ने कहा, ’शक्ति है तो सृष्टि है; भगवान शिव भी शक्ति के बिना अधूरे है; बिना नारी के घर केवल मकान है, नारी ही उसे घर बनाती है. माँ, भगवान के बाद आशा की किरण है.
यह कार्यक्रम पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, डिवाइन शक्ति फाउण्डेशन की अध्यक्ष डॉ साध्वी भगवती सरस्वती जी के दिव्य सान्निध्यमें कार्यक्रम की मुख्य अतिथि श्रीमती रेखा आर्य, विशिष्ट अतिथि विधायक श्रीमती ऋतु खण्डूरी और महानिदेशक स्वास्थ्य विभाग उत्तराखण्ड डॉ अर्चना श्रीवास्तव एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ.

अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर परमार्थ निकेतन में प्रातःकाल अमेरिका से आयी योगाचार्य लौरा प्लम ने शक्ति योग का अभ्यास कराया. तत्पश्चात परमार्थ गंगा तट पर शक्ति हवन का आयोजन किया गया जिसमें अनेेक देशों के योग जिज्ञासुओं, योगाचार्यो ने भी सहभाग, परमार्थ परिवार के सदस्यों एवं ऋषिकुमारों ने सहभाग किया. दोपहर में अमेरिका से विशेष रूप से आयी सुश्री अनुराधा जी द्वारा शक्ति नृत्य, गंगा स्नान, जापान की प्रसिद्ध गायिका डैफनी त्से व उनके ग्रुप द्वारा संगीत की प्रस्तुति दी गयी.
अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर डिवाइन शक्ति फाउण्डेशन और कैन प्रोटेक्ट फाउण्डेशन के संयुक्त तत्वाधान में उत्तराखण्ड राज्य की आशा कार्यकर्ताओें को महिला स्वास्थ्य, कैंसर रोकथाम और जागरूकता विषय पर डाॅ सुमिता प्रभाकर द्वारा प्रशिक्षण दिया गया. डॉ सुमिता प्रभाकर ने बताया कि 35 वर्ष की आयु के पश्चात महिलाओं को अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना चाहिये . उन्होने कहा कि राज्य की आशा कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित कर स्वास्थ्य जागरूकता संदेश को प्रदेश की हर महिला तक पहुंचाना चाहते है. हमारा उद्देश्य है कि ’आशा की किरण’ कार्यक्रम के माध्यम से हम वास्तव में स्वस्थ जीवन की आशा, जागृत करने में सफल होंगे.
पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा, ’’ हम इक्कीसवीं सदी में दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के नागरिक है. हमारे राष्ट्र को दुनिया के बेशुमार सांस्कृतिक समृद्धि वाले राष्ट्रों में शामिल किया गया है. वैदिक युग से लेकर इक्कीसवीं सदी तक भारत ने दुनिया को संस्कार, संस्कृति और शान्ति की शिक्षा दी है इसमें भारत की नारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है. फिर भी भारतीय समाज ने नारी को कभी भी नारी के रूप में स्वीकार नहीं किया गया. यदि नारी को नारी के रूप में स्वीकार किया गया होता तो जौहर, तलाक, सौतन, विधवा जैसे शब्द पुरूषों के अस्तित्व को भी कलंकित कर रहे होते.
इक्कीसवीं सदी की नारी बेचारी नहीं बल्कि बहादुर है, उसे ’संरक्षण नहीं संसाधन’ चाहिये. नारी को पुरूष के बराबर या समानता का अधिकार नहीं बल्कि केवल नारी के रूप में स्वीकारने का न्याय चाहिये. आज पुरूष वादी मानसिकता के कारण समाज में जो अत्याचार और उत्पीड़न की घटनायें घट रही हंै उससे उपर उठ कर नारी के प्रति स्वच्छ मानसिकता चाहिये. मुझे लगता है कि अब हर घर में; हर परिवार में एक सेन्टर, एक केन्द्र अवश्य खुलना चाहिये वह है बेटों को बेटियों की इज्जत करने की शिक्षा देना. हर माँ को चाहिये की वह बच्चों के बीच लिंग को लेकर भेदभाव नहीं करे; बेटियों को कमतर नहीं आके. जब बच्चे बचपन से इस वातावरण में बड़े होंगे तो निश्चित रूप से समाज में विलक्षण परिवर्तन ला सकते है.’’

साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा कि ’’हम दुनिया को बदलने की बात करते हैं, दुनिया को बदलने के लिये बेटियों को जीवन देना उन्हें शिक्षित करना आवश्यक है. बेटियां शिक्षित होंगी तो समझों हमने दो पीढ़ियों को शिक्षित किया. आज इस सभ्य और सुंस्कृत समाज में सोच बदलने की जरूरत है; बेटा और बेटी के बीच के अन्तर को दूर करने की आवश्यकता है. उन्होने कहा कि दुनिया का सबसे ताकतवर शब्द है ‘माँ’. चाहे धर्म कोई भी हो, कोई भी सभ्यता हो या फिर आदिमयुग हो या वर्तमान, माँ तो माँ है . माँ हमेशा से शक्ति, प्राण, ऊर्जा, प्रेम, करूणा और ममता को अपने आंचल में समेटे अपने घर-संसार का ताना बाना बुनती है फिर उस माँ की, मातृ शक्ति की नारी की पीड़ा को समझना; उसके भविष्य को समझना और उसके भविष्य के बारे में सोचना बहुत जरूरी है. इस ओर हर भारतीय का थोड़ा सा प्रयास देश की आधी आबादी का भविष्य बदल सकता है.’’
अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने राज्य मंत्री उत्तराखण्ड सरकार माननीय रेखा आर्य, विधायक यमकेश्वर माननीय ऋतु खण्डूरी जी, पर्यावरणविद् डॉ वन्दना शिवा जी, श्रीमती हंसा जयदेव जी, सचिव मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड, श्रीमती राधिका झा जी, डॉ राधिका नागरथ, डेजा क्राॅस, प्रभावती ड्वाहा जी, शहला एटेफेग जी, गीतांजलि बब्बर जी, डॉ अर्चना जोहरी, डॉ सुमिता प्रभाकर, श्रीमती हर्षा हिन्दुजा जी, वीणा अग्रवाल, योगाचार्य लौरा प्लम्, किआ मिलर, अनन्द्रा जार्ज, डैफनी त्से, मीनाक्षी पटेल, हेमल चित्र, साध्वी आभा सरस्वती जी, स्वामिनी आदित्यनन्दा सरस्वती जी एवं सुश्री नन्दिनी त्रिपाठी जी को उनकी उत्कृट सेवाओं के लिये पुरस्कृत किया गया.
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