
आध्यात्मिक गुरू और मुस्लिम मौलाना ने मिलकर मनाया रक्षाबन्धन
- स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज को मौलाना कोकब मुजत़बा ने बांधी राखी
- परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमारों ने बड़े धूमधाम से रक्षाबन्धन पर्व मनाया
- हमारी सबसे बड़ी पहचान और सबसे बड़ा रिश्ता है कि हम भारतीय है, हम हिन्दुस्तानी है
- नारी शक्ति को सुरक्षित भयमुक्त वातावरण प्रदान करे-स्वामी चिदानन्द सरस्वती
ऋषिकेश, 26 अगस्त। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने देशवासियों को रक्षाबंधन की शुभकामनायें दी। आज एक अद्भुत दृश्य देखने को मिला जब हिन्दु धर्मगुरू स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज को शिया धर्मगुरू मौलाना कोकब मुजतबा ने बढ़े ही प्रेम से राखी बांधी। साथ ही एक मुस्लिम बहन ने आगे बढ़कर स्वामी जी महाराज के कलाई पर राखी बांधते हुये कहा कि मुझे इस रक्षाबंधन पर्व पर आपसे एक आश्वासन चाहिये एक आशीर्वाद चाहिये, ’’ मेरे देश में अमन चैन बना रहे, मेरा भारत नज़ीर बने, एक उदाहरण बने, एक दृष्टांत बने मोहब्बत का आपसी सद्भावना के रिश्तों का, सद्भाव का, भाईचारे का और उसे किसी की नज़र न लगे। यह दृश्य देखकर वहां सैकड़ों की संख्या में उपस्थित लोग भावुक हो गये। स्वामी जी महाराज ने कहा कि यह हमारे भारतीयों की देश भक्ति और कहा कि यह रक्षाबन्धन सर्वधर्म सद्भाव का संदेश लिये एक अनूठा पर्व बन गया।
शिया जगत के विद्वान मौलना कोकब मुजतबा ने स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज को राखी बांधते हुये कहा कि यह बंधन है प्रेम का, मोहब्बत का और यही एहसास सारी दुनिया को कराना है। उन्होने कहा कि हम एक कुनबा है तो स्वामी जी महाराज कहा कि हम एक परिवार है और सब मिलकर अपने देश के लिये, अपने वतन के लिये मिलकर कार्य करे। स्वामी जी ने कहा कि यह एक धागा नहीं बल्कि इसके पीछे एक गाथा है। धागा जब भी कलाई पर बहनें बांधे या फिर हम आपस में जिसको भी बांधे उससे भीतर से भी एक करीबी रिश्ता जुड़ जाता है। भारत में रिश्ते किश्तों में नहीं होते है, रिश्ते, रिसते नहीं है बल्कि उनमें जान होती है, एक जीवन होता है अतः इन रिश्तों को हम प्रयत्नपूवर्क बनायें रखे। हमारी सबसे बड़ी पहचान है कि हम भारतीय हैं और सबसे बड़ा रिश्ता हैं कि हम भारतीय हैं और हम हिन्दुस्तानी हैं।
परमार्थ निकेतन में विश्व के विभिन्न देशों से आये सैलानियों, परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमारों तथा परमार्थ परिवार के सदस्यों ने बड़े धूमधाम से रक्षाबन्धन का पर्व मनाया। तत्पश्चात परमार्थ गंगा तट पर ऋषिकुमारों का उपनयन संस्कार सम्पन्न हुआ। उपनयन संस्कार के पश्चात सभी ऋषिकुमारों ने स्वामी जी महाराज से मंत्र लिया तथा सभी ने मिलकर विश्व शान्ति के लिये प्रार्थना की। सभी ऋषिकुमारों को देशी-विदेशी बहनों ने मिलकर राखी बांधी।
साध्वी भगवती सरस्वती जी ने दिल्ली योग शक्तिपीठ से विशेष रूप से रक्षाबन्धन का पर्व मनाये आये पूज्य रसायनी बाबा को राखी बांधी।

अमेरिका से आयी फैशन डिजाइनर संजना जाॅन ने परमार्थ निकेतन में आयोजित रक्षाबंधन एवं ऋषिकुमारों का उपनयन संस्कार में सहभाग किया और कहा कि आज सचमुच ऋषिकुमारों के उपनयन संस्कार को देखकर लगा की हर घर में हर परिवार में यह संस्कार हो इन्ही संस्कारों के कारण सचमुच भारत विश्व गुरू के उस दर्जे पर जहां वो था वहां है और रहेगा आज भी भारत में सचमुच उसका दर्शन कर सकते है। मैने पहली बार गंगा के तट पर उपनयन संस्कार के दर्शन किये वास्तव में अद्भुत अनुभव था।
स्वामी जी को राखी बांधने के पश्चात मौलाना कोकब मुजतबा ने ’’भारत माता की जय, वंदे मात्रम’’ का उद्घोष किया तथा रक्षाबंधन पर एक सुन्दर प्रेम भरी नज्म (कविता) सुनायी।
परमार्थ गंगा तट पर होने वाली आज की दिव्य गंगा आरती को राष्ट्र की सभी बहनों, बेटियों एवं मातृशक्ति को समर्पित की। जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती जी ने सायंकालीन सत्संग में रक्षाबन्धन के महत्व के विषय में सभी को जानकारी प्रदान की।
परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि भारत ने सदियों से हमें मानवीय मूल्य और श्रेष्ठ संस्कारों से युक्त जीवनपद्धति प्रदान की है। हमारे राष्ट्र का गौरवशाली इतिहास रहा है तथा जिस राष्ट्र ने विश्व को शान्ति का संदेश, गंगा और हिमालय दिया है, आईये आज उस राष्ट्र का रक्षाबन्धन करें और संकल्प करें कि हम अपने राष्ट्र को स्वच्छ, स्वस्थ, समृद्ध और उसकी गौरवशाली परम्पराओं को बनायें रखने में पूर्ण सहयोग प्रदान करेंगे।

स्वामी जी महाराज ने देश के भाई बहनों से आह्वान किया कि सभी प्रकृति संरक्षण के लिये आगे आये और रक्षाबन्धन के साथ वृक्षाबन्धन का पर्व मनाये, वृक्ष लगाएं और वृक्ष लगे रहे यह भी प्रयास करें। वृक्षों की रक्षा का संकल्प लें तथा वृक्षों को दीर्घायु होने का वचन दे तथा प्रकृति के साथ भावनात्मक रिश्ता बना कर रखे।
स्वामी जी महाराज ने कहा कि रक्षाबन्धन, राष्ट्रीय भावना, पारिवारिक एवं सामाजिक एकबद्धता एवं एकसूत्रता की शिक्षा देता है इसे आत्मसात करे और राष्ट्र भक्ति को समर्पित जीवन जियें।
स्वामी जी महाराज ने भारत के सभी भाईयों से आह्वान किया कि वे भारत की सभी बेटियों, बहनों, माताओं और बहुओं की रक्षा का संकल्प लें तथा नारी शक्ति को सुरक्षित भयमुक्त वातावरण प्रदान करे। गंगा तट पर रक्षाबन्धन के पावन अवसर पर स्वामी जी महाराज ने सभी राष्ट्र रक्षा और वृक्ष रक्षा का संकल्प कराया।
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