सद्गुरु जग्गी वासुदेव, आचार्य लोकेश के सान्निधि में राष्ट्रपति ने किया महाशिवरात्रि का उदघाटन
- राज्यपाल, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल सहित लाखों श्रद्धालुओं ने समारोह में शिरकत की
- राजस्थान के कलाकारों ने आदियोगी के समक्ष सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया
ईशा फ़ाउंडेशन के संस्थापक पूज्य सद्गुरु जग्गी वासुदेव, अहिंसा विश्व भारती के संस्थापक प्रख्यात जैन आचार्य डा. लोकेश मुनि के सन्निधि मे शिव की विशाल प्रतिमा के सामने महाशिवरात्री कार्यक्रम का आयोजन हुआ। कार्यक्रम मे भारत के राष्ट्रपति माननीय श्री राम नाथ कोविन्द, तामिलनाडू के राज्यपाल श्री बनवारी लाल पुरोहित, केंद्रीय मंत्री श्री पीयूष गोयल अनेक प्रख्यात महानुभावों और 5 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने पूरी रात आदियोगी महाशिव की 112 फीट मूर्ति के समक्ष आयोजित महाशिवरात्री महोत्सव में भाग लिया। कार्यक्रम में अनेक आध्यात्मिक और मनमोहक कार्यक्रमों के साथ बाड़मेर के कलाकारों ने भी सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया।

ईशा फाउंडेशन के संस्थापक परम पूज्य सदगुरू ने माननीय राष्ट्रपति का मुख्य अतिथि के रूप में और आचार्य लोकेश का विशेष अतिथि के रूप में स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह हमारे लोइए गौरव कि बात है और हमारा सौभाग्य है कि हमारे साथ भारत के राष्ट्रपति इस अवसर पर उपस्थित है। सदगुरू ने सभी राज्य के राज्यपालों, मंत्रियों,गणमान्य व्यक्तियों और लाखों लोगो जो इस अवसर पर उपस्थित थे और वेब और सोशल मीडिया के माध्यम से कार्यक्रम को देख रहे करोड़ों लोगों का भी स्वगात किया।
माननीय राष्ट्रपति ने आदियोगी दिव्य दर्शन, ध्वनि और प्रकाश लेजर शो, का उद्घाटन किया और कहा कि आदियोगी ने 112 तरीकों को उजागर किया, जिनके माध्यम से मनुष्य अपने परम स्वभाव तक पहुंच सकता है। दिव्य दर्शन की स्थापना आदियोगी आगंतुकों के लिए एक नियमित सुविधा बन गई है। अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि शिव का संदेश है “एक उपयोगी जीवन वह है जो दूसरों की सेवा में समर्पित हो”। उन्होंने 112 फीट आदियोगी के समक्ष लाखों लोगों के साथ महाशिवरात्रि मनाने पर खुशी जताई। राष्ट्रपति के साथ उनकी पत्नी श्रीमती सविता कोविंद, तमिलनाडु के राज्यपाल और अन्य गणमान्य लोगों के साथ ईशा योग केंद्र और लिंग भैरवी देवी मंदिर का दौरा किया।
परम पूज्य आचार्य लोकेश मुनि ने कहा कि प्रथम जैन तीर्थंकर ऋषभ और शिव का संबंध गहन अध्ययन का विषय है। दोनों के बीच अनेक समानताएं हैं। उन्होंने अपने गृह जिले बाडमेर राजस्थान के कलाकारों का परिचय देते हुए कहा कि मुझे इस बात का गौरव है कि मेरी जन्म भूमि बाड़मेर जिले के कलाकारों को राष्ट्रपति के समक्ष ऐतिहासिक कार्यक्रम प्रस्तुत करने का अवसर मिला।
Editorial Review Note
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