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संकष्टी चतुर्थी का महत्व, चंद्रोदय का समय, पूजा विधि और कथा

संकष्टी चतुर्थी का महत्व, चंद्रोदय का समय, पूजा विधि और कथा

संकष्टी चतुर्थी का महत्व, चंद्रोदय का समय, पूजा विधि और कथा
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संकष्टी चतुर्थी का महत्व, चंद्रोदय का समय, पूजा विधि और कथा

संकष्टी चतुर्थी का महत्व, चंद्रोदय की समय, पूजा विधि और कथा

वर्ष 2019 में 24 जनवरी को संकष्टी चतुर्थी पर चंद्रोदय रात 08 बजकर 02 मिनट

हिंदू संस्कृति में व्रत और त्यौहारों का खास महत्व है। हर महीने कोई ना कोई व्रत होता है और हर व्रत का अपना अलग महत्व है। इन्ही पर्वों में खास है संकष्टी चतुर्थी का पर्व, जिसे सकट चौथ, वक्रतुंडी चतुर्थी, माघी चौथ और तिलकुटा चौथ के नाम से भी पुकारा जाता है। संकष्‍टी चतुर्थी का अर्थ है संकट को हरने वाली चतुर्थी। इस दिन सभी दुखों को खत्म करने वाले गणेश जी का पूजन और व्रत किया जाता है। मान्‍यता है कि जो कोई भी पूरे विधि-विधान से पूजा-पाठ करता है उसके सभी दुख दूर हो जाते हैं।

हिन्दु कैलेण्डर में हर महीने दो बार चतुुर्थी होती है अमावस्या के बाद आने वाली शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी तो वही पूर्णिमा के बाद आने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। इनमें सबसे खास होती है माघ महीने की संकष्टी चतुर्थी जिसका बेहद ही खास महत्व माना जाता है। इस बार माघ महीने की सकट चौथ 24 जनवरी 2019 को है। ये पर्व पश्चिमी और दक्षिणी भारत में खासतौर से काफी प्रसिद्ध है।

इस बार 48 वर्षों बाद अर्ध कुंभ पर्व के दौरान ये व्रत होगा और इस दिन गणेश चतुर्थी के साथ बृहस्पतिवार पड़ने से भगवान विष्णु का भी पूजन किया जाएगा। ऐसे में व्रत का महत्व और भी ज्यादा बढ़ गया है। दरअसल, बृहस्पतिवार के दिन सकट चौथ का पड़ना और भी शुभ माना जाता है। ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री ने बताया कि बृहस्पतिवार को सकट चौथ का व्रत रखा जाएगा। इसे तिलकुट चतुर्थी भी कहा जाता है। सकट चौथ संतान की लंबी उम्र की कामना के लिए रखा जाता है। 24 जनवरी 2019 के दिन 9 बजकर 25 मिनट में चंद्रमा उदय होगा। इसके बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर ही ये व्रत पूरा होगा। चंद्रमा को अर्घ्य देकर प्रसाद ग्रहण करने बाद ही व्रत खोला जाएगा। ऐसी मान्यता है कि सकट चौथ के व्रत से संतान की सारी बाधाएं दूर होती हैं। साथ ही भाई बहनों के आपसी प्रेम की भावना बढ़ती है। उन्होंने बताया कि इसी दिन भगवान गणेश अपने जीवन के सबसे बड़े संकट से निकलकर आए थे। इसीलिए इसे संकट या सकट चौथ कहा जाता है। सकट चौथ के दिन ही भगवान गणेश को 33 करोड़ देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त हुआ था। निराहार रखा जाने वाला यह संकट चौथ का व्रत रात को चंद्रमा या तारों के दर्शन करके अर्ध्य देकर खोला जाता है। संतान की लंबी उम्र के लिए बृहस्पतिवार 24 जनवरी को सकट चौथ का व्रत किया जाएगा । इस दिन संकट हरण गणपति और चंद्रमा का पूजन किया जाता है।

24 जनवरी 2019 को इस समय होगा चंद्रोदय

इस वर्ष सकट चौथ यानि कि संकष्टी चतुर्थी पर चंद्रोदय का शुभ मुहूर्त रात 8.20 बजे है। इसके बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर ही ये व्रत पूरा होगा। चंद्रमा को अर्घ्य देकर प्रसाद ग्रहण करें और उसके बाद ही खाना खाकर व्रत खोलें।

संकष्‍टी चतुर्थी की तिथि और शुभ मुहूर्त 

माघ कृष्‍ण संकष्‍टी चतुर्थी प्रारंभ : 23 जनवरी 2018 को रात 11 बजकर 59 मिनट से
माघ कृष्‍ण संकष्‍टी चतुर्थी : 24 जनवरी 2018 को रात 08 बजकर 54 मिनट तक।।

चंद्रोदय का समय

24 जनवरी 2018 को रात 08 बजकर 02 मिनट

क्यों हैं विशेष यह संकष्टी चतुर्थी

इस बार माघ महीने की संकष्टी चतुर्थी गुरूवार को है इसलिए इसका महत्व और भी ज्यादा बढ़ गया है। दरअसल, गुरूवार के दिन सकट चौथ का पड़ना और भी शुभ माना जाता है। इस दिन महिलाएं परिवार की सुख समृद्धि के साथ साथ अपने बच्चों की खुशहाली की कामना करती हैं ताकि उन पर किसी तरह का कोई कष्ट न आए।

कैसे करें संकष्टी चतुर्थी का व्रत

– सुबह सवेरे नहा धोकर उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख कर गणेश जी की पूजा करें।
– गणेश जी को दुर्वा, पुष्प, रोली, फल सहित मोदक व पंचामृत चढ़ाएं।
– संकट चौथ के दिन गणेश को तिल के लड्डू का भोग लगाएं।
– संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा सुनें और गणपति जी की आरती करें।
– शाम को चंद्रोदय के बाद चांद को अर्घ्य देकर व्रत खोलें।

जानिए इस दिन भूलकर भी नही करें यह काम

  • शास्त्रों के अनुसार इस दिन भूमि के अंदर होने वाले कन्द मूल सेवन नहीं करना चाहिए इसलिए मूली, प्याज, गाजर, चुकंदर खाने से परहेज रखें।
  • इस व्रत में तिल का खास महत्व है इसलिए जल में तिल मिलाकर जल से अर्घ्य देने का विधान है। ऐसी मान्यता है कि इससे आरोग्य सुख की प्राप्ति होती है।
  • इस दिन सूर्योदय से पहले स्नान करके उत्तर दिशा की ओर मुंह करके भगवान गणेश की पूजा करना चाहिए और जल अर्पित करना चाहिए।
  • इस दिन तिल खाने और तिल नाम के उच्चारण से पाप कट जाते हैं। इस दिन तिल का दान भी उत्तम माना गया है।
  • इस दिन दूर्वा के अलावा शमी का पत्ता, बेलपत्र, गुड़ और तिल से बने हुए लड्डू भी भगवान गणेश जी को अर्पित कर सकते हैं।इस दिन गणेश जी को दुर्वा अवश्य चढ़ाना चाहिए। दुर्वा में अमृत का का वास माना जाता है। गणेशजी को दुर्वा अर्पित करने से स्वास्थ का लाभ मिलता है। मान-प्रतिष्ठा और धन सम्मान में भी वृद्धि होती है।
RW

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By Religion World January 24, 2019 5 min read
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