इस फतवे ने दिलायी इस्लाम को असल पहचान
रियाद,12 नवम्बर; इस्लाम धर्म को जहा एक तरफ आतंक से जोड़ा जा रहा है, जहां इस्लाम में जरी किये गए फतवों से मुस्लिम समुदाय को परेशानी का सामना करना पड़ता है वहीँ दूसरी तरफ सऊदी अरब के इस्लामिक विद्वान ने इस्लाम की सही परिभाषा को दुनिया तक पहुंचाने के लिए एक फतवा जारी किया है.
इस्लामिक स्कॉलर अब्दुल्ला बिन सुलेमान एल-मना ने यह फतवा जारी किया है. इस फतवे में इस्लाम धर्म की खूबसूरती, उसमें बसी दया, करुना की भावना के बारे में बताया गया है.
अब्दुल्ला बिन सुलेमान एल-मना ने अपने इस फतवे के ज़रिये मुस्लिम समुदाय से अपील की है कि वो इस्लाम धर्म में मौजूद सहनशीलता, दया और सहिष्णुता के मूल्यों को दूसरों तक पहुंचाए.
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कुवैती अखबार अल-अन्बा में छपी खबर के अनुसार इस इस्लामिक स्कॉलर ने अपने फतवे में मुस्लिमों को संबोधित करते हुए कहा है कि वो सूफी संतों की दरगाहों, चर्च और दूसरे धर्मस्थलों पर जाकर प्रार्थना कर सकते हैं. इतना ही नहीं अब्दुल्ला बिन सुलेमान नाम के इस्लामिक विद्वान ने हजरत पैगबंर मुहम्मद साहब का जिक्र करते हुए कहा कि “ये पूरी धरती अल्लाह की है और “धरती को मेरे लिए शुद्धि का एक स्थान दिया गया है.“ अब्दुल्ला सुलेमान ने कहा कि इस्लाम सहनशीलता का धर्म है और इसके मूल तत्वों को लेकर मुसलमानों में किसी तरह के मतभेद नहीं हो सकते हैं. लेकिन इस्लाम की अलग-अलग शाखाओं को मानने वालों में जरुर अंतर हो सकता है.
अब्दुल्ला बिन सुलेमान एल-मना ने हजरत पैगबंर मुहम्मद साहब से जुड़ा एक किस्सा भी बताया है, जिसमें मुहम्मद साहब ने सऊदी अरब के नजरान शहर में ईसाईयों के एक दल का स्वागत किया था. उन्होंने केवल इस दल का स्वागत ही नहीं किया, बल्कि प्रार्थना करने के लिए उन्हें मस्जिद में जगह दी. ये कहानी बताती है कि इस्लाम कैसे दूसरे धर्मों के लोगों की भावनाओं और उनकी धार्मिक मान्यताओं का सम्मान करता है.
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अब्दुल्ला बिन सुलेमान एल-मना ने इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे देशों में इस्लाम के पनपने का हवाला देते हुए कहा कि मुस्लिम व्यापारियों के अच्छे बर्ताव की वजह से इन मुल्कों में इस्लाम ने अपनी जड़ें जमाईं.
यहां आपको बताते चलें कि ये कोई पहला अवसर नहीं है जब अबदुल्ला सुलेमान ने ऐसा कोई फतवा जारी किया है. दस साल पूर्व भी उन्होंने मुसलमानों को चर्च जाने के लिए बयान जारी किया था, ताकि वो इस धर्म के बारे में जानकारी इकठ्ठा कर सकें और चर्च में प्रार्थना के तौर-तरीकों को करीब से समझ सकें.
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