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आज है न्‍याय के देवता शनि की जयंती, जानिए महत्‍व और जन्‍म कथा

आज है न्‍याय के देवता शनि की जयंती, जानिए महत्‍व और जन्‍म कथा

आज है न्‍याय के देवता शनि की जयंती, जानिए महत्‍व और जन्‍म कथा
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आज है न्‍याय के देवता शनि की जयंती, जानिए महत्‍व और जन्‍म कथा

शनि जयंती को शनि अमावस्‍या के नाम से भी जाना जाता है. भगवान शनि का जन्‍मदिन वट सावित्री व्रत के साथ मनाया जाता है. इस दिन भक्‍त व्रत रखते हैं और शनि देव की कृपा पाने के लिए मंदिर उनके दर्शन करने जाते हैं.



शनि को न्‍याय का देवता भी कहा जाता है. मान्‍यता है कि शनि निष्‍पक्ष रूप से न्‍याय करते हैं और अगर वे अपने भक्‍तों से प्रसन्न हो गए तो उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.

कहते हैं कि जिन्‍हें शनि का आशीर्वाद नहीं मिलता उन्‍हें अनेक यातनाओं का सामना करना पड़ता है. शनि जयंती के दिन हवन, होम और यज्ञ कराना शुभ माना जाता है. इस दिन लोग साढ़े साती के दुष्‍प्रभाव को कम करने के लिए शनि शांति पूजा भी करवाते हैं.

शनि जयंती का महत्‍व 

शनि दोषों से छुटकारा पाने और शनि कृपा के लिए इस दिन भगवान शनि की पूजा का विशेष महत्व है। शनि जयंती पर शनि मंदिर में तेल के दीये जलाए जाते हैं। ज्योतिष शास्त्र में शनि की विशेष भूमिका होती है।

शनि को न्यायाधीश का दर्जा प्राप्त है। शनि व्यक्ति को उनके कर्मो के हिसाब से उचित फल देते हैं। अच्छे कर्म करने पर अच्छा फल और बुरा कर्म करने पर बुरा फल मिलता है।

जिन जातकों की ऊपर शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या रहती है उनके लिए शनि जयंती पर भगवान शनि की पूजा करने से साढ़ेसाती का असर कम होता है।

यह भी पढ़ें-शनि जयंती 2020: जानिए शनि जयंती का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

भगवान शनि की जन्‍म कथा 

आज है न्‍याय के देवता शनि की जयंती, जानिए महत्‍व और जन्‍म कथा
पौराणिक मान्‍यताओं के अनुसार एक बार सूर्यदेव की पत्नी छाया ने उनके प्रचंड तेज से भयभीत होकर अपनी आंखें बंद कर ली थीं. बाद में छाया के गर्भ से शनिदेव का जन्म हुआ.

शनि के श्याम वर्ण को देखकर सूर्य ने पत्नी छाया पर आरोप लगाया कि शनि उनका पुत्र नहीं है. कहते हैं कि तभी से शनि अपने पिता सूर्य से शत्रुता रखते हैं.

शनि देव ने अनेक वर्षों तक शिव की तपस्‍या की थी. शनिदेव की भक्ति से प्रसन्न होकर शिवजी ने उनसे वरदान मांगने को कहा.

शनिदेव ने प्रार्थना की, “युगों-युगों से मेरी मां छाया की पराजय होती रही है, उसे मेरे पिता सूर्य द्वारा बहुत अपमानित व प्रताड़ित किया गया है. इसलिए मेरी माता की इच्छा है कि मैं अपने पिता से भी ज्यादा शक्तिशाली व पूज्य बनूं.”



तब भगवान शिवजी ने उन्हें वरदान देते हुए कहा, “नवग्रहों में तुम्हारा स्थान सर्वश्रेष्ठ रहेगा. तुम पृथ्वीलोक के न्यायाधीश व दंडाधिकारी रहोगे.”

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By Shweta May 22, 2020 3 min read
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