परमार्थ निकेतन द्वारा स्वच्छता और जल संरक्षण के प्रति जागरूकता हेतु जन जागरण रैली का आयोजन

गंगा एक्शन परिवार, परमार्थ निकेतन और ग्लोबल इण्टरफेथ वाश एलायंस के संयुक्त तत्वाधान में 200 से अधिक स्कूली छात्रों ने स्वच्छता बैनर, झण्डे और स्वच्छता नारे लगाकर किया स्वच्छता के प्रति जागरूक
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- पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने स्कूली छात्रों को कराया पर्यावरण एवं जल संरक्षण का संकल्प
- परमार्थ निकेतन में छात्रों को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाने हेतु चित्रकला एवं स्लोगन लेखन का किया आयोजन
- बच्चों ने एक दूसरे को गंगा राखी पहनाई
- नहीं चेते, तो 50 साल में उजड़ जायेगी दुनिया
- जल संरक्षण हेतु सहकारिता और जन सहभागिता नितांत आवश्यक – स्वामी चिदानन्द सरस्वती

ऋषिकेश, 26 अप्रैल। परमार्थ निकेतन द्वारा स्वच्छता और जल संरक्षण के प्रति जागरूकता हेतु जन जागरण रैली का आयोजन किया गया जिसमें ऋषिकेश के प्रकाश भारती, एसवीएन पशुलोक, एसवीएन चन्द्रेश्वर पब्लिक स्कूल तथा परमार्थ गुरूकुल स्कूलों के छात्र-छात्राओं ने सहभाग किया।
परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष, गंगा एक्शन परिवार के प्रणेता एवं ग्लोबल इण्टरफेथ वाश एलायंस के संस्थापक पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज के दिव्य संरक्षण एवं मार्गदर्शन में स्वच्छता जन जागरण रैली का आयोजन किया गया जिसमें स्कूली छात्रों, परमार्थ निकेतन के कार्यकर्ता, देश-विदेश से आये योग जिज्ञासु एवं परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमारों ने बढ़-चढ़ कर भाग लिया।
स्वच्छता रैली की शुरूआत परमार्थ निकेतन से होते हुये राजाजी नेशनल पार्क मार्ग, वानप्रस्थ से होकर पूरे स्वर्गाश्रम क्षेत्र में स्वच्छता नारे व स्लोगन, नुक्कड नाटक, स्वच्छता बैनर और झण्डे लेकर स्वच्छता जन जागरण अभियान एवं सफाई अभियान चलाया गया। बच्चों द्वार एक दूसरे को इस संकल्प के साथ गंगा राखी पहनाई गयी की वह गंगा को अपनी बहन की तरह मानेगे और उस की रक्षा करंेगे।
स्कूली छात्रों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने हेतु परमार्थ निकेतन में चित्रकला और स्लोगन कम्पटीशन का आयोजन किया गया। इस कम्पटीशन में बेहतर प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं एवं स्कूलों को पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने पुरस्कार और प्रमाणपत्र देकर पुरस्कृत किया।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने छात्रों को जल एवं स्वच्छता के विषय में अवगत कराते हुये कहा, जल के बिना जीवन सम्भव नहीं है तथा स्वच्छता के अभाव में स्वस्थ जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। जल वैज्ञानिक यह घोषणा कर रहे है कि भारत में 2030 तक भूजल स्तर वर्तमान समय से आधा हो जायेगा और 2040 तक विश्व का भूजल स्तर भी तीव्र वेग से कम होता जायेगा इसलिये इस दिशा में युवा पीढ़ी को जल संरक्षण क्रान्ति लाने की नितांत आवश्यकता है। जल के बिना सृष्टि पर किसी भी जीव के जीवन की कल्पना करना असंभव है। जल के संरक्षण के लिये तकनीकी, मार्गदर्शन, सहकारिता और जन सहभागिता नितांत आवश्यक है। जल का अशुद्ध होना प्रकृति प्रदत्त समस्या नहीं मानव निर्मित समस्या है। मानव व्यवहार में परिवर्तन कर कुछ हद तक हम समाधान प्राप्त कर सकते है।
स्वामी जी ने कहा कि वर्तमान समय में जीवन आधारित आवश्यकतायें स्वच्छ जल और शुद्ध वायु दोनों समस्याओं का हल वृक्षारोपण में निहित है। जब तक पर्याप्त मात्रा में पृथ्वी पर वृक्ष मौजूद थे दोनों समस्यायें भी नही थी जब से वृक्षों को काटकर कंक्रीट के जगंल खड़े हुये समस्यायें भी बढ़ती गयी। उन्होने युवा पीढ़ी से आह्वान किया कि वे हर पर्व, विवाहदिवस और जन्मदिवस के अवसर पर पौधा रोपण कर देश में हरियाली और खुशहाली लायें।’’


इस अवसर पर विशेष रुप से ग्रीन वाॅटर टेक्नलौजी से रजनीश मेहरा, स्वच्छता एवं पेय जल से इंजीनियर ममता तिवारी, इंजीनियर आर0 के0 सिहं, कार्यक्रम निदेशक स्वामिनी आदित्यनन्दा सरस्वती जी, कार्यकम संयोजन सुश्री नन्दिनी त्रिपाठी, सैमुअल, वन्दना शर्मा, जैम्स टोपो, विशाल भट्ट, रामचरण, प्रकाश भारती से आशा गैरोला, एस0वी0एन0 पशुलोक से राजा राम जी, एस0वी0एन0 चन्दे्रश्वर से श्रीमति मिनाक्षी रावत, चन्दे्रश्वर पब्लिक स्कूल से शिव कुमार जी ने सक्रिय योगदान प्रदान किया।
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