हज सब्सिडी: दिल्ली सरकार ने किया विरोध…. जाने हज subsidy के बारे में विस्तार से
नयी दिल्ली, 20 जनवरी; दिल्ली सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री राजेंद्र गौतम ने हज सब्सिडी बंद करने का विरोध किया है. उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान में सभी धर्मों को समान अधिकार हैं. जब कुंभ, कैलाश मानसरोवर यात्रा जैसे धार्मिक कार्यों में सरकारी फंड खर्च हो सकता है तो हज सब्सिडी जारी रखने में केंद्र को क्या दिक्कत है. अल्पसंख्यक मामलों की समन्वय बैठक में शिरकत करने लखनऊ आए राजेंद्र गौतम शुक्रवार को वीवीआईपी गेस्ट हाउस में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे. उन्होंने समन्वय बैठक बुलाए जाने पर सवाल उठाए. कहा कि बैठक में सिर्फ योजनाओं की जानकारी दी गई, जिनके बारे में सब जानते हैं. बैठक के प्रचार पर हुए खर्च को उन्होंने सरकारी फंड का दुरुपयोग बताया.
कैसे शुरू हुई हज सब्सिडी
1960 के दशक में तेल निर्यातक देशों के संगठन OPEC के बनने के बाद ईंधन का खर्च बढ़ा. इसके कुछ सालों बाद ही 1973 में समुद्री मार्ग से जा रहे हज यात्रियों का जहाज हादसा हुआ. इन बातों को देख इंदिरा गांधी की सरकार ने हवाई सब्सिडी की शुरूआत की. ताकी हज यात्रियों को सुरक्षित और कम दामों में हवाई मार्ग से हज पर पहुंचाया जा सके.
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कैसे मिलती है हज सब्सिडी
हर साल लाखों मुस्लिम यात्रा पर जाते हैं. इस यात्रा के लिए भारतीय सरकार उन्हें कुछ सब्सिडी देती, जिससे तहत फ्लाइट में जाने वाले हज यात्रियों को सरकार किराए में छूट, एयरपोर्ट पर उनके खाने का इंतजाम, दवाइयां और अस्थायी आवास की सुविधा देती है.
हज सब्सिडी पर सरकार का खर्चा सबसे पहले शुरू होता है हवाई यात्रा से। जहां हाजियों को सऊदी अरब तक आने-जाने के लिए हवाई यात्रा खर्च 55 से 60 हजार रुपए आता है इसमें से सिर्फ 12 हजार रुपये हज जाने वाले को देने होते हैं बाकी रकम सरकार सब्सिडी के रूप में भुगतान करती है। सरकारी एयरलाइन कंपनी एयर इंडिया को इसका जिम्मा सौंपा जाता रहा है, लेकिन कई हाजियों ने इसका विरोध करते हुए कहा था कि प्राइवेट एयरलाइन कंपनी यह काम 15 से 20 हजार रुपए में ही कर रही हैं.
इसके अलावा सरकार ने हाजियों की दो कैटिगरी (ग्रीन और अजीजिया) निर्धारित कर रखी हैं। इस बार सरकार ने ग्रीन कैटेगरी के लिए अधिकतम 2,39,600 रुपये तय किए, वहीं अजीजिया कैटेगरी के लिए ये रकम 2,06,200 रुपये थी. वहीं एयर-फेयर की वजह से हर राज्य का खर्च अलग-अलग होता है। खाने-पीने पर हाजियों को खुद ही खर्च करना पड़ता है.
लेकिन अब भारतीय सरकार यह सब्सिडी नहीं देगी, बल्कि इस पैसों को लड़कियों की पढ़ाई के लिए उपयोग में लाएगी. अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने यह ऐलान किया. उनके अनुसार इस सब्सिडी का फायदा ज़रूरतमंद मुसलमानों को नहीं मिल रहा. इसीलिए अब इस रुपयों को शिक्षा में निवेश किया जाएगा.
हज यात्रा पर सब्सिडी ब्रिटिश काल से दी जा रही है. मुसलमान आबादी को देखते हुए आजादी के बाद हज कमिटी एक्ट 1959 के तहत इस यात्रा को मुसलमानों के लिए सुविधाजनक बनाया गया. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने गरीब मुसलमानों को इस सुविधा को ना मिलता देख 2012 में कहा कि हज सब्सिडी को 2022 तक पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा. इस आदेश में कहा गया कि यह सब्सिडी न केवल असंवैधानिक है बल्कि कुरान की शिक्षाओं के अनुरूप भी नहीं है.
वहीं, सेंट्रल हज कमिटी ने भी 2017 में कहा कि 2018 तक 700 करोड़ की हज सब्सिडी को पूरी तरह खत्म कर शैक्षिक कार्यक्रम में लगाया जाएगा, खासकर अल्पसंख्यक समुदाय की लड़कियों की शिक्षा पर.
इस साल बढ़े 5000 यात्री
मुख्तार अब्बास नकवी ने साथ ही कहा कि समुद्री जहाज से हज यात्रा हवाई मार्ग से सस्ती पड़ती है. इसी वजह से सऊदी अरब ने भारत के हज कोटे में 5000 की वृद्धि की है. यानी अब इतने अतिरिक्त हज यात्री हज पर जा सकेंगे. मुख्तार अब्बास नकवी द्वारा सऊदी के हज व उमराह मंत्री मोहम्मद सालेह बिन ताहेर बेनतेन के साथ द्विपक्षीय वार्षिक हज समझौता 2018 पर हस्ताक्षर के कुछ दिनों बाद यह फैसला आया.
2018 में कितने यात्री जाएंगे हज
हज के लिए 2018 में 3.55 लाख आवेदन प्राप्त हुए हैं. इस साल कुल 1.75 लाख भारतीय नागरिक हज पर जा सकते हैं. बीते साल सऊदी अरब ने भारत के हज कोटे में 35,000 की वृद्धि की थी और इस साल 5 हज़ार की बढ़ोत्तरी और कर दी है. भारतीय हज समिति लकी ड्रॉ के जरिए हज यात्रा पर जाने वालों के नाम तय करेगी.
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