“दुर्लभ प्रतिभाओं को तराश रहा ब्रह्मकुमारीज संगठन”

- रशिया से शामिल हुए रूसी महासंघ के पायलट अंतरिक्ष यात्री सर्गेई अवदीव
- टीवी ऑइकॉन बीके शिवानी ने कहा- हमारे कर्म और बोल दर्शनीय मूर्त हों
- मुंबई वोरीवली के कलाकारों ने नृत्य की शानदारी प्रस्तुति दी
- महासम्मेलन में आए 100 से अधिक देशों से विदेशी मेहमान
आबू रोड, 24 फरवरी, निसं।
ब्रह्माकुमारी संस्थान के शांतिवन परिसर में चल रहे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में शनिवार को दूसरे दिन जब विदेश से पधारीं जानी-मानी हस्तियों ने भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता का गुणगान किया तो डॉयमंड हॉल तालियों से गूंज उठा। विदेशी अतिथियों ने ब्रह्माकुमारी संस्थान की सराहना करते हुए इसे विश्व बंधुत्व और शांतिदूत बताया। इस दौरान नाइजीरिया से भारत पहली बार आईं वैज्ञानिक डॉ. वायोला निकोलस ने हिंदी में गीत जैसा सोचोगे तुम, वैसा बन जाओगे, जैसा कर्म होगा, वैसा फल पाओगे… गाकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
महासम्मेलन में रशिया से आए रूसी महासंघ के पायलट अंतरिक्ष यात्री सर्गेई अवदीव ने अपने उद्बोधन में जमकर भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक ज्ञान का गुणगान किया।उन्होंने कहा कि ब्रह्माकुमारी संगठन द्वारा सिखाए जा रहे राजयोग से मन को जो सुकून, शांति और खुशी मिलती वह और कहीं नहीं है।
मध्यप्रदेश इंदौर से पधारे राज्य मठ-मंदिर सलाहकार समिति के अध्यक्ष श्रीश्री 1008 महामंडलेश्वर ओम राधे-राधे बाबा ने कहा कि भारत को प्रेम, अध्यात्म के साथ विश्वगुरु के शिखर पर ले जाने का कार्य ब्रह्माकुमारी के महाकुंभ से किया जा रहा है। इस महाकुंभ से लोगों के विचार श्रेष्ठ बनाने, संस्कारों को बदलने और जीवन चरित्र को ऊंचा बनाने का अभियान चलाया जा रहा है।

हृदय और मन की शुद्धता ही ब्रह्माकुमारी की सुंदरता : न्यायाधीश विमला
तमिलनाडू मदुरई हाईकोर्ट की न्यायाधीश एस विमला ने कहा कि भगवान सब जगह नहीं हो सकते हैं इसलिए उन्होंने ब्रह्माकुमारी संस्थान को बनाया। हृदय और मन की शुद्धता ही ब्रह्माकुमारी की सुंदरता है। राजयोग से हमें शांति और खुशी मिलती है। ये कॉन्फें्रस हमें संदेश देती है कि हम अच्छी चीजों और अच्छी बातों को फॉलो करके खुश रह सकते हैं। हमें भगवान से जो आध्यात्मिक ऊर्जा चाहिए वह सब हमें मिलती है लेकिन हम बाहर की तरफ भागते हैं। भगवान के जरिए हमें राजयोग का जो संदेश मिला है उसे जीवन में धारण कर प्रचार-प्रसार करना चाहिए।
जीवन में सदा सच्चाई और सफाई रखें: दादी जानकी
संस्था की मुख्य प्रशासिका दादी जानकी ने कहा कि जीवन में सदा सच्चाई और सफाई रखें। चिंता में समय नहीं गंवाओ। भगवान ने कहा है ये क्या, क्यों में समय नहीं गंवाओ, जो हो रहा है अच्छा हो रहा है और जो होगा वह भी अच्छा होगा। हर एक कार्य में परमात्म की इच्छा मानकर चलें। सदा याद रखें मैं आत्मा हूं और परमात्मा की संतान हूं। सदा चेहरे पर खुशी की झलक दिखे। शांति हमारा स्वधर्म है। हम सभी परमात्मा, ईश्वर के बच्चे हैं। भाग्य विधाता अर्थात् भाग्य बनाने वाला।

दुर्लभ प्रतिभाओं को तराश रहा संगठन
लोकसभा टीवी के सीईओ और चीफ एडिटर डॉ. आशीष जोशी ने कहा कि यह विश्व का एकमात्र ऐसा संगठन है जिसकी बागडोर महिलाओं के हाथों में है। यही वजह है कि ब्रह्माकुमारी संगठन मानव के अंदर छुपी दुर्लभ प्रतिभाओं का तराशने का कार्य सफलतापूर्वक कर रहा है। यहां से ईश्वरीय योजना चलाई जा रही है। राजयोग से हम स्वयं को जान सकते हैं।
संस्था की संयुक्त मुख्य प्रशासिका दादी रतनमोहिनी ने कहा कि परमात्म ज्ञान को अंगीकृत करने से ही मन में वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना जागृत होगी। महासचिव बीके निर्वैर ने सभी प्रतिभागियों को संकल्प कराया कि आज से किसी भी परिस्थिति में गुस्सा नहीं करेंगे। जनरल मैनेजर बीके मुन्नी बहन ने कहा कि हर कार्य में परमात्मा को साथ रखकर निमित्त भाव से करें। सदा निर्माण चित्त होकर चलें। सभी को सम्मान देना, कम बोलना, धीरे बोलना और मीठा बोलना अपने अमल में लाएं। कार्यक्रम संयोजक बीके मृत्युंजय भाई ने कहा कि शांति चर्चा का नहीं अनुभव का विषय है। यहां से यह संकल्प करके जाएं कि हम पवित्र आत्मा बनेंगे। मधुरवाणी गु्रप के कलाकारों ने स्वागतम् शुभस्वागतम् हैप्पी वेलकम् गीत गाया। संचालन कर्नाटक हुबई से आईं बीके वीना बहन ने किया।

अपना जीवन दर्शनीय बनाएं: टीवी ऑइकॉन सिस्टर शिवानी
मोटिवेशनल स्पीकर और टीवी ऑइकॉन सिस्टर शिवानी ने कहा कि जैसे हम अपने बच्चों के कॅरियर का प्लान बनाते हैं वैसे ही हम सब आत्माओं के परमपिता परमात्मा ने हमारा प्लान बनाया है। परमात्मा हमें देवता बनाने आए हैं। जब संसार में माता-पिता का अपने बच्चे के लिए बनाया गया प्लान पूरा हो जाता है तो फिर भगवान का प्लान तो पूरा होना ही है। आज अपने आप से पूछें कि क्या मैं सारी दुनिया के बीच रहते मैं देवता बनने के लिए तैयार हूं। आज तक हम सुनते थे कि नर ऐसी करनी करे जो नारायण बने। हम वो नर-नारी हैं जिसे स्वयं परमात्मा ने सिलेक्ट किया है। परमात्मा हमें शिक्षा देकर नारायण और लक्ष्मी बना रहे हैं। परमात्मा कहते हैं मेरे बच्चों योग करो, पढ़ाई करो और मेरी बताई धारणा पर चलो औ जीवन सात्विक बनाओ। साथ में वो ताकत देता है। आज सभी संकल्प लें कि हम अपना जीवन मंदिर में विराजित देवी-देवता जैसे उच्च और दर्शनीय बनाएंगे। स्वयं में ऐसे दैवीगुण धारण करें जो देखते ही लोग कहें ये तो जैसे देवता हैं।
अंतरराष्ट्रीय मंच से इन विदेशी आध्यात्मिक जगत की हस्तियों ने रखे विचार
शुद्ध भावना होने पर ही जुड़ सकेंगे भगवान से
यूएसए वाशिंगटन डीसी में ब्रह्माकुमारी की डायरेक्टर बीके जेन्ना ने कहा हमारे अंदर हृदय, विचारों और भावनाओं की पवित्रता कैसे हो, यह सब सीखने के लिए ही हम सभी यहां आते हैं। जब तक हमारी शुद्ध भावना नहीं होगी, हम भगवान से नहीं जुड़ सकते हैं। दूसरों के प्रति कल्याण की भावना और शुभभावना हो।
चाइना के 30 शहरों में फैला राजयोग
चाइना में ब्रह्माकुमारा की डायरेक्टर डेइंग चेन ने कहा कि चाइना के 30 शहरों में आध्यात्मिक ज्ञान और राजयोग की शिक्षा दी जा रही है। इस ज्ञान से व्यक्ति का जीवन पूरी तरह बदल जाता है और वह नई जिंदगी की ओर आगे बढ़ता है।
संस्कार बदलने से बदलेगा संसार
यूएसए न्यूयार्क में ब्रह्माकुमारी पीस विलेज की डायरेक्टर डॉ. कला लेंगर ने कहा कि जब तक हम अपने संस्कार नहीं बदलेंगे, तब तक हम अपना संसार नहीं बदल सकते हैं। उन्होंने अपने जीवन का अनुभव बताते हुए कहा कि इस संस्था से जुडऩे के बाद मेरा नजरिया पूरी तरह से सकारात्मक हो गया। इस दिव्य ज्ञान की आज सभी को जरूरत है।
पहले खुद को पहचानें
जर्मनी में ब्रह्माकुमारी की डायरेक्टर बीके सुदेश बहन ने कहा कि जब तक हम खुद को नहीं पहचानेंगे तब तक खुदा को नहीं पहचान सकते। आप सभी माउंट की इस तपस्या भूमि पर आए हैं। पूर्व जन्म के पुण्य कर्मों की बदौलत ही यहां तक आप पहुंचे हैं।
प्रतिभागियों को सिखाए स्वस्थ रहने के गुर
शनिवार को महासम्मेलन में सुबह 6.30 बजे से 7 बजे तक प्रतिभागियों को स्वस्थ रहने के गुर बताए गए। ग्लोबल हॉस्पिटल की डॉ. बीके सुजाता बहन ने सभी को आसान एक्सरसाइज कराई। साथ ही अपनी दिनचर्या कैसी रखें आदि के बारे में बताया।
हमारे अंदर छुपा है सभी समस्याओं का समाधान
सुबह के मेडिटेशन सत्र में वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका बीके शीलू बहन ने कहा कि इस शरीर को चलाने वाली चैतन्य शक्ति आत्मा है। आत्मा अपनी तीन शक्तियों मन, बुद्धि और संस्कार से इस शरीर द्वारा कर्म करती है। मन जहां सोचने का कार्य करता है तो बुद्धि सही-गलत का निर्णय करती है। जो कर्म हम इस शरीर के माध्यम से करते हैं वह हमारे संस्कार बन जाते हैं। जब हम राजयोग का अभ्यास शुरू करते हैं तो हमारे मन में सकारात्मक विचार आने लगते हैं और श्रेष्ठ विचार होने से कर्म और संस्कार भी श्रेष्ठ बन जाते हैं।
मोर पंखों के साथ किया पंछी नृत्य
सांस्कृतिक कार्यक्रम में मोर की पंखुडिय़ों को लेकर बाली से आए कलाकारों ने पंछी नृत्य पेश कर सबका मन मोह लिया। इन कलाकारों ने सुर और ताल के अद्भुत संगम से नृत्य कौशल दिखाया। इसके अलावा इंडोनेशिया के कलाकारों और अभिनेत्री ग्रेसी सिंह के ग्रुप के कलाकारों ने शिव और श्रीकृष्ण के चरित्रों की महिमा को गीत और नृत्य के माध्यम से पेश किया। वहीं नाइजीरिया से पहली बार भारत आई विदेशी मेहमान हिंदी में जैसा सोचोगे तुम, वैसा बन जाओगे, जैसे कर्म होंगे, वैसा ही फल पाओगे…गीत गाकर सभी का आश्चर्यचकित कर दिया।
आज के कार्यक्रम…
25 फरवरी को प्रथम सत्र में सुबह 7 बजे से 8.30 बजे तक समाज परितर्वन के लिए सर्वोच्च सत्ता की भूमिका, द्वितीय सत्र में सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक आंतरिक विकास में आध्यात्मिकता और परिवर्तन के प्रणेता युवा एवं महिलाएं और तृतीय सत्र में शाम 5 बजे से रात 8.30 बजे तक ज्ञान के युग में मूल्य आधारित मीडिया और प्रेमपूर्ण समाज में न्याय पालिका की भूमिका विषय पर सत्र चलेंगे।
देखिए आज के कार्यक्रम की झलक….
देखिए 23 फरवरी के कार्यक्रम की झलक….
वीडियो साभार – https://www.facebook.com/brahmakumaris/
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