मकर संक्रांति कब है? कब कर रहा है सूर्य मकर राशि में प्रवेश – कुम्भ का पहला शाही स्नान
14 जनवरी की शाम 7 बजकर 50 मिनट पर सूर्य का मकर राशि में प्रवेश होते ही उत्तरायण शुरू हो जाएंगे। इसी के साथ दुनिया के सबसे बड़े महापर्व कुम्भ आधिकारिक तौर पर शुरू हो जाएगा। प्रयागराज में तेरह अखाड़े तैयार है। नागा साधु कमर कस चुके है। शुभ कुम्भ की धरा पर संगम इंतजार में है कि कब रवि मकर राशि में प्रवेश करे और लाखों भक्तों को पुण्यकाल में संतों के संग स्नान का सौभाग्य मिले।

मकर संक्रांति का महत्व खास है। और इस बार प्रयाग में अर्द्ध कुम्भ के लगने से ये और खास हो गया है। 15 की भोर से अखाड़ों के सभी संत और साधु, हिंदू धर्म के सैकड़ो संप्रदायों के संन्यासी, ब्रह्मचारी, साधु गंगा में एक डुबकी के लिए आ जुटेंगे।
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शास्त्रों में लिखा है कि प्रयाग तीर्थ में एक महीने की तपस्या इतनी खास है कि इससे देवलोक में एक कल्प तक निवास के समान फल मिलता है। गोस्वामी तुलसीदासजा ने को रामचरित मानस में साफ लिखा है कि….
माघ मकर रविगत जब होई। तीरथ पति आवहिं सब कोई।।
देव दनुज किन्नर नर श्रेणी। सादर मज्जहिं सकल त्रिवेणी।।
एहि प्रकार भरि माघ नहाहीं। पुनि सब निज निज आश्रम जाहीं।।
अर्थात – सूर्य की मकर राशि की यात्रा का शुभफल अमोघ हैं, इस माह में किसी भी तीर्थ, नदी अथवा समुद्र में स्नानकरके दान पुण्य करके जीवात्मा कष्टों से मुक्ति पा सकती है किन्तु प्रयाग तीर्थ के मध्य दैव संगम का फल सभी कष्टों से मुक्ति दिलाकर मोक्ष देने में सक्षम है।
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