गलवान वैली में हिंसक झड़प में शहीद हुये हमारे सैनिकों को नमन
- अद्म्य साहसी और वीर सैनिकों की श्हादत को भारत सदा याद रखेगा
- परमार्थ निकेतन में दीप जलाकर व मौन रखकर शहीदों की आत्मा को ज्योति और शान्ति प्रदान हो इसकी प्रार्थना
- जब बात देश की अस्मिता, अखंडता, सम्प्रभूता और एकता की है तो पूरा देश एक साथ है – स्वामी चिदानन्द सरस्वती
18 जून, ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि भारत ने हमेशा से ही पूरे विश्व को शान्ति का संदेश दिया है परन्तु जब बात देश की अस्मिता, अखंडता, सम्प्रभुता और एकता की हो तो पूरा देश एक साथ है। जब बात देश की रक्षा की है तो पूरा राष्ट्र अपने सैनिकों के साथ है। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति हमेशा से ही न तनाव देने की है और न हिंसा की। हम विवाद पर नहीं संवाद पर विश्वास करते है परन्तु जब बात हमारी भारत माता की रक्षा, देश की अस्मिता और हमारे शहीदों की शहादत की है तो देश कैसे चुप रह सकता है।
स्वामी जी ने कहा कि हमारा देश एक तरफ जहां कोरोनावायरस से जूझ रहा है, वहीं दूसरी तरफ गलवान वैली में हिंसक झड़प और हमारे सैनिकों पर विश्वास में किया गया हमला अत्यंत निंदनीय है। स्वामी जी ने कहा कि जो शहीद हुए हमारी हिफाजत में, देश की रक्षा ही जिन की इबादत है, ऐसे भारत माता के पुत्रों को भावभीनी श्रद्धाजंलि, भगवान उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें एवं उनके परिवार को इस दुख को सहने की शक्ति प्रदान करें।

स्वामी जी ने कहा कि सैनिक किसी संत से कम नहीं होते, वे अपने जान की परवाह किये बिना हमारी सरहदों की रक्षा के लिये हमेशा तैनात रहते हैं उन वीर सैनिकों की देशभक्ति को नमन।
स्वामी जी ने कहा कि भारत के सैनिक किसी संत से कम नहीं हैं। संत, संस्कृति की रक्षा करते हैं और सैनिक देश की सीमाओं की सुरक्षा करते हैं। सैनिक हैं तो हमारी सीमाएं सुरक्षित है; सैनिक हैं तो हम हैं, हमारा अस्तित्व है उनकी वजह से आज हम जिंदा हैं और हमारा देश भी ज़िंदा हैं। सैनिक अपनी जान को हथेली पर रखकर अपने देश की रक्षा करते हैं। भारत की महान, विशाल और गौरवशाली विरासत है। हमें इस देश की विशालता, विरासत में मिली है इसके गौरव को बनाये रखने में सहयोग प्रदान करें और जिन जवानों की वजह से हमारा तिरंगा लहरा रहा है उनके परिवार के साथ खड़े रहें।
भारत के प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेेन्द्र मोदी जी ने आत्मनिर्भर भारत की बात कहीं आज उसकी जरूरत भी है, हम सब को मिलकर अपने देश को एक आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाना है।
Editorial Review Note
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