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“Attention से Tension दूर” – राजयोगिनी दादी जानकी, ब्रह्माकुमारीज

“Attention से Tension दूर” – राजयोगिनी दादी जानकी, ब्रह्माकुमारीज

“Attention से Tension दूर” – राजयोगिनी दादी जानकी, ब्रह्माकुमारीज
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“Attention से Tension दूर” – राजयोगिनी दादी जानकी, ब्रह्माकुमारीज

“Attention से Tension दूर” – राजयोगिनी दादी जानकी, ब्रह्माकुमारीज

तनाव मनुष्य के जीवन का हिस्सा हो गया है। यदि यह संभव है तो हमें अपने आपसे पूछने की आवश्यकता है कि आराम से जीना संभव है तो हम परेशान होकर क्यों जी रहे है? क्या कारण है? जब हम इस समस्या का समाधान साधारण तरीके से कर सकते है तो हम परेशान व अव्यस्थित तरीके से क्यों अपने लाइफ को खर्च कर रहे हैं? कितने लोग गुस्से को जीत चुके है? कुछ महीने पहले हैप्पीनेस वेल बीइंग विषय पर कार्यक्रम था। उस कार्यक्रम में एक निर्णय लिया गया कि हम सबकी डिक्सेनरी से स्ट्रेस सदा के लिये निकल जाये। क्योंकि यह शब्द बीस वर्ष पहले हमारे बीच आया। हम बार-बार रिपीट करते आ रहे है। यदि हम कोई शब्द बार-बार रिपीट करते हैं। तो वह क्या बन जाता है? जब शाम को हम वापिस घर जाते हैं तो बच्चे भी बार-बार वही शब्द बोलते हैं। अब नया शब्द आया है चेंज। आजकल हम स्ट्रेस शब्द की जगह डिप्रेस्ड शब्द का यूज कर रहे हैं। आजकल बच्चे कहते है कि मैं डिप्रेशन का अनुभव कर रहा हूॅ! यदि हम इसको समाप्त नहीं करते है तो परिणाम यह होगा कि यह जो शब्द डिप्रेस्ड है वह वास्तिवकता में परिवर्तित हो जायेगा अर्थात हमारे जीवन का अंग बन जायेगा।

भारत के साथ अन्य देशों में हम परिवर्तन शक्ति पर विश्वास करते हैं। इसके साथ ही पावर ऑफ मंत्र पर भी बिलिव करते हैं। वास्तव में मंत्र क्या है? वेरी हाई एनर्जी पाजीटिव वर्ड को बार-बार रिपीट करने से हम हाई एनर्जी का अनुभव करते हैं। और रिलेक्स मन का अनुभव करते हैं? मंत्र का मतलब हाई एनर्जी वर्ड अर्थात शक्तिशाली शब्दों का बार-बार रिपीटेशन करना। उसी प्रकार हाई एनर्जी निगेटिव मंत्र है। मैं बहुत डिप्रेस्ड हूॅ। मैं बहुत डिप्रेस्ड हूॅ। यह डिप्रेस्ड शब्द जो हम बार-बार रिपीट करते है। जिससे निगेटिव एनर्जी बनती है। और हम हैवी बन जाते हैं। हम गुस्सा क्यों करते है? बताइये हम गुस्सा क्यों करते है? कोई मुझसे शेयर करना चाहेगा कि हम गुस्सा क्यों करते हैं। जब हमारी इच्छायें ज्यादा होती हैं और कहीं परिस्थितियॉ व लोग हमारी इच्छाओं को पूरा नहीं देते तथा लोग हमसे ज्यादा इच्छायें व आशायें रखते हैं। जब व्यक्ति व परिस्थितियॉ जिनको हम चाहते नहीं है वह हमारे सामने आ जाती हैं तो हम ईरीटेट हो जाते हैं। और जल्दी गुस्से में आ जाते हैं।

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परिस्थितियॉ व व्यक्ति वह मार्ग नहीं हैं जो हम पाना चाहते है। अपने आपसे एक प्रश्न पूछिये क्या यह संभव है कि परिस्थितियॉ व व्यक्ति समान हो? व्यक्तियों को भूल जाइये क्या बच्चे हमारे अनुसार चलते हैं। नही ना। तो साधारण सी बात है कि जब हमारा बच्चा हमारे अनुसार नहीं चल सकता। तो हम अपने कर्म क्षेत्र पर अन्य व्यक्तियों से कैसे इच्छा कर सकते है कि यह हमारे अनुसार चलेगे जबकि वह अलग -अलग परिवार से आये है तथा जिनके संस्कार व विचार अलग- अलग हैंं। यह सबके अपने-अपने संस्कार हैं। यदि किसी व्यक्ति के संस्कार हमसे मिलते हैं तो उसके साथ रहना सहज होता है। एवं खुशी में आ जाते हैं और यदि किसी के डिफरेन्ट संस्कार हैं तो हमारा चलना मुश्किल होता है। एक शब्द लें सिंसयरिटी। लोग सेन्सियर रहते हैं। सिंसयरटी की परिभाषा क्या है? सिंसयरिटी की परिभाषा व्यक्तियों के अनुसार अलग-अलग होगी। यदि यह प्रोग्राम तीन बजे है और मुझे 2:45 पहुॅच जाना चाहिये यह भी समय की पाबंदी है और अन्य व्यक्तियों के अनुसार प्रोग्राम तीन बजे है और मुझे फिक्स तीन बजे पॅहुचना है। तो यह भी समय की पाबंदी है। और प्रोग्राम तीन बजे से है तो निश्चित तौश्र पर हमें समय से पहुचना चाहिए। तो जो इस प्रकार के लोगों के डिसीजन हैं इन्हीं का नाम संस्कार हैं और यह संस्कारों के उपर ही आधारित रहता है कि हमारा डिसीजन क्या होगा? जो 2:45 मिनिट पर आता है वह कहता है कि मैं तीन बजकर पंद्रह मिनिट पर कैसे आ सकता हॅू। जबकि प्रोग्राम तो तीन बजे से है। यह हस्बेंड और वाईफ के साथ भी हो सकता है कि हमारे संस्कार अलग – अलग हैं। यह पेरेंट्स और चाइल्ड के साथ एवं कार्य करने वाले साथियों के साथ भी हो सकता है क्योंकि हम सबका संस्कार अलग – अलग हैं । यह हमें जान लेना चाहिये नही तो हमारी वैल्यूबल इनर्जी वेस्ट हो जायेगी । मैं आपको समझ नहीं सकता है। क्योंकि अलग अलग संस्कार है। मैं डिफरेंट हूॅ।आप डिफरेंट हैं। और हम सब डिफरेंट हैं। यह न जानने के कारण हमारे मन बुद्धि एवं शरीर पर भी गलत प्रभाव पड़ता है और हम डिप्रेशन में आ जाते हैं। अब हमें यह जानने की जरूरत कि जब संस्कार अलग- अलग हैं तो हमें गुस्सा करने की तनाव में आने की आवश्यकता नहीं है। और न ही किसी से कोई इच्छा करने की आवष्यकता क्योंकि सब के संस्कार अलग – अलग हैं । तो सीधी बात है किसी के संस्कार हमें डिस्टर्ब न कर पायें। व्यक्तियों को सलाह की आवष्यकता नहीं है कि परिवर्तित कैसे हो? बल्कि परिवर्तन षक्ति की आवष्यकता है कि परिवर्तित कैसे हो ? और यह आवष्यकता फेमिली तथा फ्रैन्ड सर्किल में भी है। लेकिन सब लोग क्रिटीसाइज करने की एवं तनाव व गुस्सा की एनर्जी को भेज रहे हैं। और हम लोगों का उत्साह कम रहे हैं। या लोगों को डिस एम्पावर कर रहे जिससे हमारा भी सेल्फ एम्पावरमेंट कम हो रहा है। यदि हम सबके प्रति रिस्पेक्ट रखे तो यही इनर्जी हमारे पास वापिस आयेगी। स्टेस एंड एंगर मींस किसी का आत्मविश्वास व उत्साह कम करना। याद करिये जब आपने किसी को डाटा हो या गलत व्यवहार किया हो। जब हमको गुस्सा आता है उस समय न ही व्यक्तियों को परिवर्तित करने की आवश्यकता होती है। न ही परिस्थितियों को परिवर्तित करने की आवश्यकता होती है। बस आवश्यकता होती है स्वयं को परिवर्तित करने की।

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जब हम किसी को एक मिनट के लिये भी डॉटते है तो इसका कितनी देर तक बहुत देर तक प्रभाव पड़ता है। हमें पता ही नहीं चलता कि हम खुश क्यों नहीं है। क्योंकि हमारे द्वारा किया गया गलत व्यवहार और कर्म हमारे साथ चलते रहते हैं। और इसके वितरीत यदि हमें किसी को प्यार करें सम्मान दें प्यार से बोले तो हमें स्वत: ही खुशी मिलती है क्योंकि उसकी दुआयें हमको मिलती रहती है। इस स्थिति में भी आपको पता नहीं चलेगा कि मैं आज बहुत खुश क्यों हूॅ। यह कर्मो की गुह्य गति है। हम एक दूसरे से वाइब्रेशन के माध्यम से जुड़े है यदि आप दिनभर खुश रहना चाहते है तो दूसरों को सम्मान एवं दुआयें दीजिये। हमें खुशी पाने के लिये कुछ अलग से नहीं करना वरन हमारे अच्छे कर्म ही खुशी का आधार हैं। प्रत्येक व्यक्ति से मिलते समय, कोई भी कार्य करते समय ब्लेसिंग दें व अच्छा व्यवहार करें। अपनी ओरिजनल स्थिति में स्थित रहें एवं किसी को गलत रिऐक्ट नहीं करें। क्या आप एक दिन की गैरन्टी ले सकते हैं कि मुझे आज रिऐक्ट नहीं करना है रिसपोडिंग करना है। चौबीस घंटे चाहे कुछ भी हो जाये हमें स्टेबल रहना है और गलत रिऐक्ट नहीं करना है। डिस्टर्ब नहीं होना है। यदि आप एक दिन भी ऐसा कर लेते है तो आने वाले चौबीस घंटों के लिये आप सेफ हो जाते हैं। यदि आप चेक करें कि मिस्टेक कहा कि तो आप पायेंगे कि मिस्टेक बाहर से नहीं बल्कि अंदर से हो रही है। अर्थात डिस्टरबेंस मन में है बाहर नहीं। यदि आप वास्तव में स्वयं की व अन्य लोगों की सुरक्षा चाहते है तो मन के रिएक्षन पर ध्यान देना होगा । मन का रिएक्शन कभी भी गलत न हो। जो खुश व्यक्ति हैं वह सेफ हैं व सुरक्षित है। किंतु डिस्टर्ब व्यक्ति , स्ट्रेस्ड व्यक्ति खुश नहीं रह सकते । यदि आपने इस प्रकार के व्यक्तियों को खुश रहना सिखा दिया तो यह सबसे टाप लीडरशीप है। जो लीडर है वह आर्गेनाइजेशन की मदर है। इस पर मत जाइये कि कोई सीईओ है, कोई डायरेक्टर है। परंतु इस पर जाइये कि जो व्यक्ति तुम्हारे लिये काम कर रहा है। वह तुम्हारी मॉ के समान है। हरेक के साथ बहुत सारा बेगेज अर्थात वजन है। हर किसी के घर में कोई न कोई समस्या चल रही है। यदि हम शाम को स्ट्रेस्ड मन से घर जाते हैं तो अगली सुबह भी हम स्ट्रेस्ड होकर ही उठेगे। इसके विपरीत यदि हम शाम को खुशी एवं अनस्ट्रेस्ड मन से घर जाते हैं। तो निश्चित ही अगली सुबह हम खुशी रहेगे एवं स्ट्रेस्ड से मुक्त रहेगें। यह एक चक्र हैं यदि चक्र स्ट्रेस की तरफ चला गया तो घर में झगड़े की संभावना बढ जाती है। और अगली सुबह तनाव युक्त हो जाती है। यह सब लीडरशीप पर डिपेंड करता है। मदर बच्चों का निस्वार्थ प्यार करती है। यह भी यह लीडरषिप है। और यदि इस प्रकार से निस्वार्थ प्यार व सहयोग करने लीडर किसी संस्थान में होगे तो अन्य व्यक्ति खुष रहेगें एवं वह एक नौकरी की भाति कार्य नहीं करेगें बल्कि अपना परिवार समझकर उस कार्य को करेंगे। और वह लाइफ टाइम तक आपके साथ रहेंगे। यह कार्य हमसे शुरू होता है कि हम अपनी कंपनी के कर्मचारियों के साथ कैसा व्यवहार करते है? यह एक बहुत बड़ी बात कि हम अपनी एनर्जी को किस प्रकार से यूज करते है एक प्रेशर के रूप में या किसी प्यार के रूप में। आप चौबीस घंटे बिना गुस्सा किये रह सकते है ? सिर्फ चौबीस घंटे ? नहीं ।

अभी जब हम पीछे बैठे थे तो लोगों ने कहा कि जो आपने एक्सप्लेन किया व बहुत ही अच्छा था लेकिन उसको प्रयोग में लाना बहुत कठिन है। अपनी आदतों को सुधारना किसी भी कार्य में सफलता पाने का मुख्य आधार है। यह पंद्रह बीस दिन कर लीजिये आदत बन जायेगी। थोड़े दिन के लिये इसको अलग तरह से कर लीजिये । यह आदत बन जायेगी । हमें केवल कुछ दिन ही अटेंशन देना होगा । फिर सब ठीक हो जायेगा। हम सब के पास दो डायरी होनी चाहिये। जिसमें मुझे आज क्या करना है? तथा दूसरी डायरी में मुझे आज क्या बनना है? एक आध्यात्मिक टीचर के पास भी दो डायरी होती है । उसमें पूरा हिसाब रहता है कि आज मैं कैसी रही ? और मैं यह सब क्यों कर रही हॅू। नौ से दस मीटिंग , दस से ग्यारह यह काम, ग्यारह से बारह वह काम आदि । और उसमें कालम रहना चाहिये कि मैं क्या ये सब काम में अच्छे से कर पाई और कार्य करते समय मेरी स्थिति कैसी रही ? क्या यह कार्य मैंने तेजी से संपन्न किये और मेरी स्थिति क्या रही ? हम वर्क लाइफ बेलेेंस के बारे में चर्चा कर रहे हैं यह आंतरिक स्थिति के बेलेंस की सीट है। यह निश्चित ही मै खुश हूॅ, मैं खुश हूॅ। यह एक मंत्र है कृपया इस मंत्र का प्रतिदिन सोने से यह अभ्यास करें कि खुशी मेरा स्वाभाव है। मेरा प्रत्येक विचार व फीलिंग लव रिस्पेक्ट और सहानुभूति से भरा है। मैं एक फरिष्ता हूॅ मेरा शरीर पूरा स्वस्थ्य है मेरे शरीर की प्रत्येक कोशिका प्यार व सम्मान से भरी है। यदि हम बार-बार यह कहते है कि मैं डिप्रेस्ड हूॅ, मैं डिप्रेस्ड हूॅ तो इसका निगेटिव प्रभाव हमारे शरीर पर भी पड़ता है। इसलिये कभी निगेटिव एनर्जी मन को न दें। जो हम सोचते हैं वही हमारे साथ घटित होता है। यदि यह अभ्यास हम चौबीस घंटे कर सकते है तो हमेषा भी कर सकते।

– राजयोगिनी दादी जानकी, मुख्य प्रशासिका, ब्रह्माकुमारीज, माउण्ट आबू

RW

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By Religion World July 10, 2017 10 min read
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