आयुर्वेद: श्रावण विशेष में करें परहेज ऐसे भोजन से
श्रावण विशेष माह को बहुत ही पवित्र महीनें के तौर पर देखा जाता है. इस पूरे माह भगवान शिव की पूजा की जाती है. और इसी माह में कांवड़ यात्रा भी की जाती है. जहाँ श्रावण माह का आध्यात्मिक और धार्मिक महत्त्व है वहीँ दूसरी ओर सावन के इस माह में बीमारियों का भी खतरा बना रहता है. इस मौसम में बहुत सोच समझकर खाद्य पदार्थ खाने चाहिए. कमजोर इम्यून सिस्टम के कारण शरीर को कई बीमारियां अपना शिकार बना लेती हैं.
आयुर्वेद के अनुसार इस मौसम में जठराग्नि (अमाशय से निकलने वाली एक तरह की अग्नि ) कमजोर रहती है. इसलिए इस दौरान आहार-विहार संबंधित नियमों का पालन करना जरूरी होता है.
तो चलिए जानते हैं आयुर्वेदाचार्य ऋषभ भट्ट से आयुर्वेद के अनुसार किन चीजों को सावन में नहीं खाना चाहिए और किन चीजों के सेवन से बचना चाहिए.
बैंगन से बनाएं दूरी

सावन में महीने में बैंगन भी नहीं खाना चाहिए. इसका धार्मिक कारण यह है कि ये भगवान शिव को चढ़ाया जाता है इसके अलावा इसे शास्त्रों में अशुद्ध कहा गया है. लेकिन वैज्ञानिक कारण यह है कि सावन में बैंगन में कीड़े अधिक लगते हैं. ऐसे में बैंगन का स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है. इसलिए सावन में बैंगन खाने से परहेज ही करना चाहिए.
हरी सब्जियों से दूर रहें

सावन के महीने में हरी सब्जियों का सेवन नहीं करना चाहिए. धार्मिक मान्यता के अनुसार सावन में हरी सब्जी का त्याग कर देने से व नियम से उपवास यानी सावन स्नान करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है, लेकिन इस मान्यता के पीछे वैज्ञानिक कारण भी है. दरअसल, आयुर्वेद के अनुसार बारिश में हरी सब्जियों में बीमारी फैलाने वाले कीटाणु बहुत अधिक होते हैं. जिससे पेट व त्वचा से संबंधित बीमारियां ज्यादा होती हैं. इस मौसम में बॉडी की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कम हो जाती है. इसीलिए सावन में हरी सब्जियां नहीं खाना चाहिए.
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न करें दूध का सेवन

कहा जाता है कि कच्चा दूध भगवान को अर्पित किया जाता है, इसलिए सावन में इनका सेवन करने से बचना चाहिए. लेकिन वैज्ञानिक कारणों के अनुसार सावन में हरियाली ज्यादा होती है. इस वजह से इनमें जहरीले कीड़े-मकौड़ों ज्यादा पनपते हैं. गाय या भैंस घास के साथ कई ऐसे कीड़े-मकोड़ो खा जाती है, जो दूध में मिलकर आपके लिए हानिकारक साबित हो सकते हैं. इस समय में दूध के सेवन से वात बढ़ता है, जिसके कारण बीमार होने की संभावना बढ़ जाती है. इसलिए सावन में दूध नहीं पीना चाहिए.
मांस-मछली, प्याज और लहसुन

सावन के महीने मांस और मछली खाने और प्याज-लहसुन का सेवन करने की मनाही होती है. तामसिक प्रवृत्ति के भोजनों से अध्यात्म के मार्ग में बाधा आती है और शरीर की भी हालत बिगड़ती है. इतना ही नहीं मांस खाने से उनमें मौजूद बैक्टीरिया और कीटाणु से आपको बीमारी भी हो सकती है. सावन माह में मछलियों के लिए प्रजनन का समय होता है इसलिए इस समय मछलियों का शिकार करना और खाना वर्जित होता है.
इन चीज़ों को शामिल करें अपने भोजन में

आयुर्वेद के अनुसार बारिश में सुपाच्य, ताजा, गर्म और जल्दी पचने वाली चीजें खाना चाहिए. इस मौसम में पुराना गेहूं, चावल, मक्का, सरसों, राई, खीरा, खिचड़ी, दही , मूंग, अरहर की दाल, सब्जियों में लौकी, तुरई, टमाटर. फलों में सेब, केला, अनार, नाशपती, पके जामुन, देशी आम और घी व तेल में बनी नमकीन चीजें खाना चाहिए. इस मौसम में आम और दूध का सेवन विशेष रूप से लाभकारी होता है. इस मौसम में जामुन खाने के भी अनेक फायदे हैं. जामुन खाने से हिमोग्लोबिन बढ़ता है, त्वचा रोग, प्रमेह रोग, आदि दूर रहते हैं. भुट्टो का सेवन शरीर के लिए बेहतर होता है.
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