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आयुर्वेद : किस महीने में क्या खाए ?

आयुर्वेद : किस महीने में क्या खाए ?

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आयुर्वेद : किस महीने में क्या खाए ?

आयुर्वेद : किस महीने में क्या खाए ?

आयुर्वेद में शरीर को स्वस्थ रखने के लिए खाने से संबंधित कई नियम बताए गए हैं। इन्ही नियमों के अंतर्गत पूरे साल के हर महीने के लिए कुछ ऐसी चीजें बताई गई हैं, जिन्हें उन महीनों में नहीं खाना चाहिए।

पुराने समय की एक कहावत है….

चौते गुड़, वैशाखे तेल, जेठ के पंथ, अषाढ़े बेल।

सावन साग, भादो मही, कुवांर करेला, कार्तिक दही।

अगहन जीरा, पूसै धना, माघै मिश्री, फाल्गुन चना।

जो कोई इतने परिहरै, ता घर बैद पैर नहिं धरै।

* चैत्र माह में गुड़ खाना मना है।

* बैशाख माह में नया तेल लगाना मना है।

* जेठ माह में दोपहर में चलना मना है।

* आषाढ़ माह में पका बेल न खाना मना है।

* सावन माह में साग खाना मना है।

* भादौ माह में दही खाना मना है।

* क्वार माह में करेला खाना मना है।

* कार्तिक माह में बैंगन और जीरा खाना मना है।

* माघ माह में मूली और धनिया खाना मना है।

* फागुन माह में चना खाना मना

साल के किस महीने में क्या न खाएं…

जनवरी-फरवरी : जनवरी और फरवरी में मिश्री नहीं खाना चाहिए। 

मार्च-अप्रैल : इस समय गुड़ नहीं खाना चाहिए। 

अप्रैल-मई : इसमें तेल व तली-भुनी चीजों से परहेज करना चाहिए। 

मई-जून : इन महीनों में गर्मी का प्रकोप रहता है अत: ज्यादा घूमना-फिरना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।

जून-जुलाई : हरी सब्जियों के सेवन से बचें। 

जुलाई-अगस्त : दूध व दूध से बनी चीजों के साथ ही हरी सब्जियां भी न खाएं। 

अगस्त-सितंबर: इन दो महीनों में छाछ, दही नहीं खाना चाहिए। 

सितंबर-अक्टूबर : इस माह में करेला वर्जित माना गया है।

अक्टूबर-नवंबर : इन दो महीनों में भी दही और दही से बनी अन्य चीजें नहीं खाना चाहिए। 

नवंबर: दिसंबर : इस समय में भोजन में जीरे का उपयोग नहीं करना चाहिए। 

दिसंबर-जनवरी : इन दोनों माह में धनिया नहीं खाना चाहिए क्योंकि धनिए की प्रवृति ठंडी मानी गई है और सामान्यत: इस मौसम में बहुत ठंड होती है।

चैत चना, बैसाखे बेल, जैठे शयन, आषाढ़े खेल, सावन, हर्रे, भादो तिल।

कुवार मास गुड़ सेवै नित, कार्तिक मूल, अगहन तेल, पूस करे दूध से मेल।

माघ मास घी-खिचड़ी खाय, फागुन उठ नित प्रात नहाय।

किस माह में क्या खाएं या करें?

जनवरी-फरवरी : घी, खिचड़ी

फरवरी-मार्च : घी, खिचड़ी और सुबह जल्दी नहाना फायदेमंद है।

मार्च-अप्रैल : चना का सेवन करें।

अप्रैल-मई : बेल

मई-जून : इन माह में पर्याप्त नींद लेना अति आवश्यक है। अन्यथा इसका बुरा प्रभाव झेलना पड़ सकता है।

जून-जुलाई : अधिक से अधिक व्यायाम और खेलना-कूदना आदि क्रियाएं करें।

जुलाई-अगस्त : हरड़ का सेवन करें।

अगस्त-सितंबर : तिल खाएं।

सितंबर-अक्टूबर : गुड़ का सेवन करें, बहुत फायदेमंद रहेगा।

अक्टूबर-नवंबर : मूली

नवंबर: दिसंबर : तेल, तेल से बनी हुई चीजे अधिक खाएं।

दिसंबर-जनवरी : नियमित रूप से दूध अवश्य पीएं।साथ ही एक सेब प्रतिदिन अवश्य लें।

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RW

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By Religion World October 6, 2018 3 min read
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