बच्चे खेल-खेल में सीख रहे मूल्यों का पाठ : अखिल भारतीय बाल व्यक्तित्व विकास शिविर

- 39वें अखिल भारतीय बाल व्यक्तित्व विकास शिविर में पहुंचे देशभर से बच्चे
- एकाग्रता के साथ सीख रहे मेडिटेशन के गुर, जिज्ञासाओं का कर रहे समाधान
- सुबह 4 बजे से उत्साह के साथ ले रहे मेडिटेशन सेशन में भाग
23 मई, आबू रोड। ब्रह्माकुमारी संस्थान के शांतिवन परिसर में गुरुवार से शुरू हुए 39वें अखिल भारतीय बाल व्यक्तित्व विकास शिविर में देशभर से बच्चे पहुंचे हैं। शिविर में बच्चे खेल-खेल में जीवन में मूल्यों का महत्व सीख रहे हैं। साथ ही सुबह 4 बजे से एकाग्रता के साथ ध्यान की धुन लगा रहे हैं। इसमें 8 से लेकर 16 वर्ष के बच्चे भाग ले रहे हैं। गीत-संगीत, डॉक्यूमेंट्री, कहानी, डांस आदि के माध्यम से बच्चे अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं। गुरुवार सुबह सबसे पहले मुरली क्लास के बाद एंजिल स्पर्धाओं के तहत बौद्धिक स्पर्धा आयोजित की गईं, जिसमें बच्चों ने अपनी बौद्धिक क्षमताओं का लोहा मनवाया। साथ ही शीघ्र काव्य सृजन, मुरली पठन स्पर्धा, मूल्य आधारित योग कॉमेन्ट्री सृजन में अपनी लेखन शैली का परिचय दिया।


शिविर में बीके सूर्य भाई ने बच्चों को शांति की शक्ति का महत्व बताते हुए कहा कि यदि कोई भी कार्य हो या पढ़ाई शांत और एकाग्रचित्त मन से की जाए तो इसमें निश्चित तौर पर सफलता मिलती है। शांति के साथ पढ़ाई करने से हमारे मन की कार्यक्षमता बढ़ जाती है। पढ़ाई करते समय अपने मन को बाहरी चीजों से हटाकर पूरा अपने अध्ययन पर फोकस करें तो जो भी पढ़ेंगे वह सब याद रहेगा। साथ ही कम समय में ज्यादा सफलता हासिल कर सकते हैं। शांति में रहकर पढ़ाई करने से हमारी मनन शक्ति भी बढ़ती है।
आदर्श विद्यार्थी जीवन में अनुशासन
प्रो. स्वामीनाथन भाई ने आदर्श विद्यार्थी जीवन में अनुशासन विषय पर संबोधित करते हुए कहा कि विद्यार्थी जीवन में अनुशासन का सबसे अधिक महत्व है। विद्यार्थी जीवन की पहली सीढ़ी है। यदि इसमें हमारी दिनचर्या व्यवस्थित, नियमित और अनुशासित रहेगी तो यह ताउम्र आपका मार्गदर्शन करेगी। जीवन में कोई भी महान कार्य अनुशासन में रहकर ही किया जा सकता है। बीके जयश्री बहन ने कॉमेन्ट्री के साथ बच्चों का राजयोग मेडिटेशन का अभ्यास कराया। उन्होंने कहा कि राजयोग मेडिटेशन करने से एकाग्रता बढ़ती है। साथ ही व्यक्तित्व का विकास होता है।

रात में सांस्कृति प्रस्तुतियों से बटोरी दाद
रात में कॉन्फ्रेंस हॉल में बच्चों द्वारा एक से बढ़कर एक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं। आकर्षक वेशभूषा में सज-धजकर बच्चों जब मंच पर पहुंचे तो तालियों की गडग़ड़ाहट से हॉल गूंज उठा। देशभर से आए हुए बच्चों ने अपने-अपने राज्यों की वेश-भूषा में सांस्कृतिक प्रस्तुति दी। इसका सभी बच्चों ने जमकर लुत्फ उठाया।
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