‘हिमालय है तो हम है’ – ‘ग्लेशियर हैं तो गंगा हैं’
- अलास्का, अमेरिका में कराया ग्लेशियर बचाओ संकल्प
- हिमालयी अनुभव जीवन में तनाव को दूर करने के लिये संजीवनी बूटी- स्वामी चिदानन्द सरस्वती
ऋषिकेश, 24 जुलाई। अमेरिका में अलास्का की यात्रा पर प्रसिद्ध भागवत कथाकार संत रमेश भाई ओझा, ब्रज की पावन धरती से पूज्य स्वामी गुरूशरणानन्द जी महाराज, परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज एवं जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव एवं डिवाईन शक्ति फाउण्डेशन की अध्यक्ष साध्वी भगवती सरस्वती जी ने पूरे विश्व के अनेक देशों एवं शहरों से आये लगभग 800 भारतीयों को भारत एवं भारतीय संस्कृति की याद दिलायी तथा भारत में माँ गंगा की प्रदूषण से बिगड़ती दशा की ओर ध्यान आकर्षित किया।
देखिए – अलास्का के खूबसूरत ग्लेशियर
परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष, ग्लोबल इण्टरफेथ वाश एलांयस के सह-संस्थापक एवं गंगा एक्शन परिवार के प्रणेता पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा, ’मन को मोहित करने वाले अलास्का के प्राकृतिक सौन्द्रर्य को देखकर सब मंत्र मुग्ध हो गये। उन्होने कहा कि भारत का गौमुख, गंगोत्री, चारों धाम तथा पूरे हिमालय का जो सौन्दर्य, दिव्यता और भव्यता है वो भी किसी से कम नहीं है। पूज्य स्वामी जी ने कहा कि यदि व्यवस्थाएँ थोड़ी और चाक-चैबन्द हो जाये ंतो अलास्का, आल्प्स एवं स्विटजरलैण्ड के साथ-साथ अपने दिव्य एवं भव्य हिमालय का भी आनन्द एवं मस्ती पाने के लिये पूरा विश्व उमड़ उठेगा। देवों और ऋषि-मुनियांे की तपस्या से अनुप्राणित शान्त एवं पवित्र हिमालयी अनुभव जीवन में तनाव को दूर करने के लिये संजीवनी बूटी की तरह काम करेगा। यहां केवल प्राकृतिक सौन्दर्य का दर्शन ही नहीं बल्कि उत्तराखण्ड की पवित्रता जीवन की बैटरी भी चार्ज करेगी।
पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने विश्व के अनेक देशों से आये सभी लोगो को उत्तराखण्ड आने के लिये आमन्त्रित करते हुये कहा कि ’भारत फस्र्ट परन्तु उत्तराखण्ड मस्ट’। उन्होने कहा कि पिछले कुछ वर्षो में अलास्का में ग्लेशियर लगभग 12 से 14 किलोमीटर दूर खिसक गया है तथा प्रतिवर्ष तीव्र गति से पीछे खिसक रहा है। अमेरिका के विशाल पेसिफिक सागर में पिघले ग्लेशियर के भारी हिमखण्ड तैरते नजर आ रहे थे। उस की संक्षिप्त फिल्म भी बनायी है और यह क्रम निरन्तर जारी है। भारत में गौमुख के ग्लेशियर की दशा के बारे में वैज्ञानिक दावा कर रहे है कि ग्लेशियर के आगे का करीब 50 मीटर हिस्सा भागीरथी के मुहाने पर गिरा हुआ है। भारत में भी भागीरथी नदी में हिमखण्ड तैरते नजर आ रहे है।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज एवं पूज्य संन्तों ने चिन्ता करते हुये खुद भी ग्लोशियर पर बैठकर संकल्प किया तथा बाद में सभी से संकल्प कराते हुये कहा कि ’हिमालय है तो हम है’, ’ग्लेश्यिर है तो गंगा है’, गंगा है तो भारत है। उन्होने याद कराया कि हम उस देश के वासी है जिस देश में गंगा बहती है। सबने संकल्प करते हुये कहा कि अलास्का यात्रा से भारत लौट कर हम अपनी नदियों के लिये तथा स्वच्छ भारत मिशन के लिये सब मिल कर काम करेंगे तथा उत्तराखण्ड एंव ऋषिकेश, हरिद्वार, चारों धामों का अवश्य कार्यक्रम बनायेंगे।
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