आधुनिक योगियों के परिचय की रिलीजन वर्ल्ड की यह पांचवी सीरीज है. इस सीरीज में आज आपका परिचय कराया जायेगा स्वामी कुवलयानंद,आनंदमूर्ति, रमन महर्षि , स्वामी शिवानन्द और के पट्टाभि जोइस से.
स्वामी कुवलयानंद
स्वामी कुवलयानंद एक शिक्षाविद थे जिन्हें मुख्य रूप से योग के वैज्ञानिक आधारों के मार्गदर्शक शोध के लिए जाना जाता है। उन्होंने 1920 में वैज्ञानिक अनुसंधान शुरू किया और 1924 में खासतौर पर योग के अध्ययन को समर्पित अपना पहला वैज्ञानिक जर्नल, योग मीमांसा प्रकाशित किया।
स्वामी एक शोधकर्ता भी थे उन्होंने ज्यादातर शोध कैवल्यधाम हेल्थ एंड योगा रिसर्च सेंटर में किए, जिसकी स्थापना उन्होंने 1924 में की थी। स्वामी कुवलयानन्द जी ऐसे असामान्य योगी थे जिन्होंने योग शिक्षा द्वारा समाज का आध्यात्मिक पुनर्निर्माण करने के लिए सारा जीवन अर्पित कर दिया ।
उन्होंने योग द्वारा अनेक असाध्य रोगों की चिकित्सा का अन्वेषण कर उसे जन – साधारण तक पहुँचाने का सतत प्रयास किया । योग विद्या जो अब तक विशिष्ट योगियों तक सीमित माना जाता था , उसे सामान्य साधक की पहुँच तक लाने का अधिकांश श्रेय ‘ कैवल्यधाम ‘ के संस्थापक स्वामी कुवलया नन्द को जाता है ।
स्वामीजी का यह विश्वास था कि जब तक मनुष्य स्वार्थ , ईर्ष्या , क्रोध , लोभ , भय आदि विषयों से अलिप्त नहीं हो पाता, तब तक स्थायी विश्व शान्ति की आशा नहीं है । उनकी मान्यता के अनुसार योग इस ध्येय प्राप्ति के लिए एक महत्वपूर्ण साधन हो सकता है । स्वामी जी का स्वप्न एक ऐसे योग निष्ठ समाज के पुन: निर्माण का था जिसके द्वारा राजकीय , आर्थिक, सामाजिक एवं नैतिक-आध्यात्मिक मूल्यों पर अधिष्ठित हों ।
आनंदमूर्ति

आधुनिक लेखक, दार्शनिक, वैज्ञानिक, सामाजिक विचारक और आध्यात्मिक नेता प्रभात रंजन सरकार ऊर्फ आंनदमूर्ति का ‘आनंद मार्ग’ दुनिया के 130 देशों में फैला हुआ है।
उनकी किताबें दुनिया की सभी प्रमुख भाषाओं में अनुवादित हो चुकी है। परमाणु विज्ञान पर उनके चिंतन के कारण उन्हें माइक्रोवाइटा मनीषी भी कहा जाता है।
आनंदमूर्ति का जन्म 1921 और मृत्यु 1990 में हुई थी। मुंगेर जिले के जमालपुर में एशिया का सबसे पुराना रेल कारखाना है। वे रेलवे के एक कर्मचारी थे। यह जमालपुरा आनंद मार्गियों के लिए मक्का के समान है। यहीं पर सन् 1955 में आनंद मार्ग की स्थापना हुई थी।
तंत्र और योग पर आधारित इस संगठन का उद्येश्य है आत्मोद्धार, मानवता की सेवा और सबकी शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक आवश्यकताओं की पूर्ति।
आनंदमार्ग के दुनिया भर में चिंतन केंद्र हैं जहां तंत्र, योग और ध्यान सिखाया जाता है। इस एकेश्वरवादी संगठन का मूल मंत्र है ‘ बाबा नाम केवलम’।
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रमन महर्षि

महर्षि रमन के माता पिता ने उनका नाम वेंकटरामन अय्यर रखा था। 1902 में ‘शिव प्रकासम पिल्लै’ नामक व्यक्ति रमण के पास 14 प्रश्न स्लेट पर लिखकर लाये।
इन्हीं 14 प्रश्नों के उत्तर रमण की पहली शिक्षाएं हैं। इनमें आत्म निरीक्षण की विधि है, जो कि तमिल में नान यार और अंग्रेज़ी में हू ऍम आई के नाम से प्रकाशित की गयी। फिर 80 के दशक में उनके मरणोपरांत उनकी नोटबुक सोलह खंडों में प्रकाशित हुई जो गंभीर योग के लिए एक रहस्यमी खजाना है।
रमण महर्षि की शिक्षाएं अमूमन नव-अद्वैत शिक्षकों के लिए प्रारंभिक बिंदु बनाती हैं, हालाकि, रामायण की शिक्षाओं की पृष्ठभूमि और पूर्ण दायरे को देखने के बजाय, केवल उनकी शिक्षाओं पर ही ध्यान केंद्रित किया जाता है जो सभी के लिए त्वरित प्राप्ति का वादा करती प्रतीत होती हैं।
कुछ नव-अद्वैत रामायण की शिक्षाओं का उल्लेख करते हैं जैसे कि रमण विद्रोही थे या किसी परंपरा से बाहर, लगभग कुछ इस तरह कि जैसे लोग कह रहे हों कि उन्होंने ही स्वयं अद्वैत का आविष्कार किया था।
जबकि रमण ने अपनी शिक्षा को प्रत्यक्ष बोध पर आधारित किया, उन्होंने अक्सर अद्वैत ग्रंथों को पढ़ने की सिफारिश की, जो उन्होंने पाया कि उन्हीं उपदेशों का प्रतिनिधित्व किया जो उनके अनुभव से उत्पन्न हुए थे।
इसमें न केवल मुख्य पारंपरिक अद्वैत गुरु आदि शंकराचार्य के कार्य भी शामिल थे, बल्कि योग वशिष्ठ, त्रिपुरा रहस्य और अद्वैत बोध दीपिका जैसे कई अन्य ग्रंथ भी शामिल थे।
स्वामी शिवानंद
स्वामी शिवानंद दार्शनिक होने के साथ ही योगाचार्य भी थे। उन्होंने योग, गीता और वेदांत पर 200 से अधिक किताबें लिखीं। स्वामी विष्णुदेवानंद उनके मशहूर शिष्य थे जिन्होंने ‘कंप्लीट इलस्ट्रेटेड बुक ऑफ योग’ नामक किताब लिखी।
उनके दूसरे शिष्यों स्वामी सच्चिदानंद, स्वामी शिवानंद राधा, स्वामी सत्यानंद और स्वामी चिदानंद ने उनके प्रयासों को जारी रखा।
स्वामी सत्यानंद ने 1964 में बिहार स्कूल ऑफ योग की स्थापना की। शिवानंद पहले मलेशिया में एक डॉक्टर थे बाद में उन्होंने भारत, यूरोप और अमेरिका में योग केंद्र खोले।
के. पट्टाभी जोइस

के. पट्टाभी जोइस ने आष्टांग विन्यास योग के नाम से योग को प्रचारित और प्रसारित किया था। जोइस ने मैसूर, भारत में अष्टांग योग अनुसंधान संस्थान की स्थापना की।
पट्टाभि जोइस मैसूर में कृष्णमाचार्य और शिष्य बी के एस अयंगर के साथ 20 वीं शताब्दी में व्यायाम के रूप में आधुनिक योग स्थापित करने में से एक हैं ।
उनके शिष्यों में मैडोना, स्टिंग और ग्वेनेथ पैल्ट्रो समेत कई हॉलीवुड अभिनेताओं के नाम लिए जाते हैं।
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