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ईरान के मुस्लिमों को भा रहा है योग और ध्यान

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ईरान के मुस्लिमों को भा रहा है योग और ध्यान
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ईरान के मुस्लिमों को भा रहा है योग और ध्यान

परमार्थ में रहकर ईरानी दल कर रहा है योग और ध्यान को आत्मसात

ऋषिकेश,11  सितम्बर; योग और ध्यान की शिक्षा ग्रहण करने हेतु ईरान का एक दल परमार्थ निकेतन पधारा. इस दल के सदस्य परमार्थ निकेतन में रहकर सत्संग, कीर्तन एवं गंगा आरती के माध्यम से भारत की संस्कृति को आत्मसात कर रहे हैं.  इस ईरानी दल के सदस्यों ने भारतीय संस्कृति एवं संस्कारों से प्रभावित होकर परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष, ग्लोबल इण्टरफेथ वाश एलायंस के सह-संस्थापक एवं गंगा एक्शन परिवार के प्रणेता पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज से मंत्र दीक्षा ली.

पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज से वेद, भारतीय दर्शन एवं आध्यात्म के विषय में जानकारी प्राप्त करने के लिये अमेरीका से एक दल भारत आया. यह दल  पूज्य स्वामी जी के मार्गदर्शन में पर्यावरण, जल के संरक्षण, स्वास्थ्य, शिक्षा, कला एवं आध्यात्म के क्षेत्र में किये जा रहे कार्यों से प्रभावित होकर परमार्थ निकेतन पधारा. इस दल के सदस्यों ने वेदों के संरक्षण का संकल्प लिया तथा पर्यावरण एवं जल के संरक्षण, स्वास्थ्य, शिक्षा, कला एवं नदियों के संरक्षण के लिये मिलकर कार्य करने की इच्छा व्यक्त की.

यह भी पढ़ें – परमार्थ निकेतन में दिया जा रहा है प्राथमिक नेत्र चिकित्सा एवं देखभाल प्रशिक्षण

पूज्य स्वामी  चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने ईरान एवं अमेरीका से आये दल के सदस्यों से चर्चा के दौरान कहा कि ’भारत की संस्कृति वसुधैव कुटुम्बकम अर्थात विश्व एक परिवार है कि संस्कृति है. भारतीय मनीषीयों ने विश्व में शान्ति की स्थापना करने के लिये अपने प्राण तक न्योछावर किये हैं. आज फिर वैश्विक स्तर पर सभी को मिलकर पर्यावरण संरक्षण के लिये प्रयास करने की जरूरत है. उन्होने कहा कि वर्तमान समय में प्रदूषण की समस्या पूरे विश्व की है क्योंकि प्रदूषण के कारण वायु, जल, जंगल और जमीन सभी प्रभावित हो रहे हैं. आज पूरे विश्व में वाटर, सैनिटेशन एवं हाईजीन की समस्या विद्यमान है इससे उबरने के लिये मिलकर कदम  बढ़ाने की नितांत अवश्यकता है. उन्होने सभी से कहा कि हमें केवल गली, गांव ही नहीं ग्रह को स्वच्छ, प्रदूषण मुक्त एवं हरियाली युक्त बनाने के लिये साथ आने की जरूरत है.


ईरान से आये यहूब तोशिफियान, साईद तोशिफियान, मासूद तोशिफियान, आजम सरलाक, शूका करामूज, फरजानेह एवं ब्राजेनजादन ने कहा कि पर्यावरण, शिक्षा, कला, स्वास्थ्य एवं जल के संरक्षण के लिये भारत आकर कार्य करेंगे.
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के साथ दल के सभी सदस्यों ने विश्व शान्ति की कामना करते हुये वाटर ब्लेसिंग सेरेमनी में सहभाग किया. सभी ने पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया.

RW

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By Shweta September 11, 2017 3 min read
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