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श्राद्ध में किन पशु पक्षियों को कराया जाता है भोजन

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श्राद्ध में किन पशु पक्षियों को कराया जाता है भोजन

श्राद्ध में किन पशु पक्षियों को कराया जाता है भोजन

श्राद्ध के दिनों में अक्सर आपने अपने आसपास लोगों को कौओं को भोजन कराते देखा होगा. ऐसा माना जाता है कि पितृपक्ष में हमारे पितर धरती पर आकर हमें आशीर्वाद देते हैं. ये पितृ सिर्फ पक्षियों के माध्यम से ही नहीं बल्कि पशुओं के माध्यम से हमारे निकट आते हैं. जिन जीवों तथा पशु पक्षियों के माध्यम से पितृ आहार ग्रहण करते हैं वो हैं – गाय, कुत्ता, कौवा और चींटी.

ज्योतिषाचार्य प्रदीप भट्टाचार्य से जब इस सन्दर्भ में रिलिजन वर्ल्ड ने बातचीत की तो उन्होंने बताया कि श्राद्ध के समय इनके लिए भी आहार का एक अंश निकाला जाता है, तभी श्राद्ध कर्म पूर्ण होता है.

यह भी पढ़ें-भारतीय संस्कृति में श्राद्ध कर्म की गरिमा

भोजन के निकलते हैं पांच अंश

ज्योतिषाचार्य प्रदीप भट्टाचार्य ने बताया कि श्राद्ध करते समय पितरों को अर्पित करने वाले भोजन के पांच अंश निकाले जाते हैं – गाय, कुत्ता, चींटी, कौवा और देवताओं के लिए. इन पांच अंशों का अर्पण करने को पञ्च बलि कहा जाता है.

क्या है पञ्च बलि देनी की विधि

ज्योतिषाचार्य प्रदीप भट्टाचार्य बताते हैं कि सबसे पहले भोजन की तीन आहुति कंडा जलाकर दी जाती है. श्राद्ध कर्म में भोजन के पूर्व पांच जगह पर अलग-अलग भोजन का थोड़ा-थोड़ा अंश निकाला जाता है. गाय, कुत्ता, चींटी और देवताओं के लिए पत्ते पर तथा कौवे के लिए भूमि पर अंश रखा जाता है. फिर प्रार्थना की जाती है कि इनके माध्यम से हमारे पितृ प्रसन्न हों.

क्या  है इन पांच जीवों का ही महत्व

ज्योतिषाचार्य प्रदीप भट्टाचार्य बताते हैं कि कुत्ता जल तत्त्व का प्रतीक है ,चींटी अग्नि तत्व का, कौवा वायु तत्व का, गाय पृथ्वी तत्व का और देवता आकाश तत्व का प्रतीक हैं. इस प्रकार इन पांचों को आहार देकर हम पंच तत्वों के प्रति आभार व्यक्त करते हैं. केवल गाय में ही एक साथ पांच तत्व पाए जाते हैं. इसलिए पितृ पक्ष में गाय की सेवा विशेष फलदाई होती है. मात्र गाय को चारा खिलने और सेवा करने से पितरों को तृप्ति मिलती है साथ ही श्राद्ध कर्म सम्पूर्ण होता है.

 

 

यह भी पढ़ें-पितरों का श्रद्धापूर्वक तर्पण ही है श्राद्ध

गाय की सेवा से पितरों का आशीर्वाद

पितृ पक्ष में गाय की सेवा से पितरों को मुक्ति मोक्ष मिलता है. साथ ही अगर गाय को चारा खिलाया जाय तो वह ब्राह्मण भोज के बराबर होता है. ज्योतिषाचार्य प्रदीप भट्टाचार्य बताते हैं कि पितृ पक्ष में अगर पञ्च गव्य का प्रयोग किया जाय, तो पितृ दोष से मुक्ति मिल सकती है. साथ ही गौदान करने से हर तरह के ऋण और कर्म से मुक्ति मिल सकती है.

 

RW

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By Shweta September 9, 2017 3 min read
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