जगद्गुरु रामानंदाचार्य हंसदेवाचार्य महाराज को अर्पित की भावभीनी श्रद्धाजंलि
- स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, कथाकार संत मुरलीधर जी महाराज और सैकड़ों भक्तों ने नम आँखों से श्रद्धाजंलि दी और मौन रखा
प्रयागराज/ऋषिकेश, 22 फरवरी। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि पूज्य जगद्गुरु रामानंदाचार्य हंसदेवाचार्य जी महाराज का अकस्मात् हम सब के बीच से यूँ चले जाना सचमुच संत समाज के लिये बहुत बड़ी क्षति है। हमने एक ऐसे संत को खो दिया जो सदैव श्री राम मन्दिर का मुद्दा हो या राष्ट्र मन्दिर की बात हो वे हमेशा सबसे आगे रहते थे, राष्ट्र के लिये हमेशा समर्पित था उनका जीवन।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि अभी कल ही तो उनसे मिलना हुआ था। परमार्थ निकेतन शिविर प्रयागराज में संत मुरलीधर जी महाराज द्वारा हो रही श्री रामकथा में भी आने का पूज्य महाराज श्री ने आश्वासन दिया था।



स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज और पूज्य जगद्गुरु रामानंदाचार्य हंसदेवाचार्य जी महाराज दोनों पूज्य संतों ने साथ बैठकर जलपान ग्रहण किया था तब उन्होने कहा था कि मैं आ रहा हूँ फिर हम बैठकर श्री राम मन्दिर के विषय में मिलकर चर्चा करेंगे। साथ ही हरिद्वार की स्वच्छता को लेकर भी दोनों संतों की वार्ता हुई थी। पूज्य हंसदेवाचार्य जी महाराज ने कहा था कि स्वच्छता अभियान को और आगे बढ़ाने की जरूरत है तथा इस कार्य के लिये मैं हमेशा आपके साथ हूँ।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने बताया कि यह संयोग की बात है कि पूज्य महाराज श्री के साथ वार्ता में मैने कहा कि आप कार में आगे न बैठा करें और कार में बैठने के बाद सीट बेल्ट का प्रयोग अवश्य करे। पूज्य स्वामी हंसदेवाचार्य जी महाराज ने मुझे जब कार में पीछे की सीट पर बैठे देखा तो कहा कि आप पीछे न बैठा करे आगे वाली सीट पर बैठें तब भी मैने उनसे निवेदन किया था कि कार में आप भी हमेशा पीछे वाली सीट पर ही बैठा करें। चर्चा के एक दिन पश्चात ही ऐसी हृदयविदारक सूचना मिली जिससे हृदय को बहुत ही चोट लगी। पूज्य महाराज श्री का ऐसे चले जाना एक अपूर्ण क्षति है जिसे कभी भी पूरा नहीं किया जा सकता।
परमार्थ निकेतन शिविर में आयोजित श्री राम कथा की पूर्णाहुति के अवसर पर पूज्यजगद्गुरु रामानंदाचार्य हंसदेवाचार्य जी महाराज को भावपूर्ण श्रद्धाजंलि प्रदान की गयी। श्रद्धाजंलि अर्पित करते हुये सभी की आँखे नम हो गयी।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि विधाता को क्या मंजूर था विधाता ही जाने परन्तु संत समाज ने आज एक मिलनसार और देशभक्त संत खो दिया।
श्री राम कथा की पूर्णाहुति के अवसर पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, कथाकार संत श्री मुरलीधर जी महाराज और सैकड़ों की संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने दो मिनट का मौन रखकर भावभीनी श्रद्धाजंलि अर्पित की।
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