लिंडौ, जर्मनी में 10वीं शान्ति विश्व सभा का आयोजन
- विभिन्न धर्म और अनेक देशों से 1000 से अधिक धार्मिक नेताओं ने सहभाग किया
- भारत से साध्वी भगवती सरस्वती जी कर रही है हिन्दू धर्म का प्रतिनिधित्व
- रिंग फाॅर पीस समारोह में शान्ति की स्थापना के लिये प्रार्थना, ध्यान और जुलूस का आयोजन
- सभी सीमाओं से परे शान्ति की स्थापना के लिये मिलकर कार्य करने का लिया संकल्प
ऋषिकेश/ जर्मनी, 23 अगस्त। डाॅ साध्वी भगवती सरस्वतीजी ने लिंडौ, जर्मनी में आयोजित होने वाले पाचं दिवसीय ’’10 वीं शान्ति विश्व सभा’’ में विशेष रूप से सहभाग किया। इस भव्य कार्यक्रम में विश्व के 100 से देशों से विभिन्न धर्मो के 1000 से अधिक धार्मिक नेताओं ने सहभाग किया।
शान्ति विश्व सभा माध्यम से धार्मिक नेताओं ने पृथ्वी पर शान्ति की स्थापना के लिये अनेक कार्यक्रमों, प्रार्थना, ध्यान, गीत-संगीत और ’रिंग फाॅर पीस’ समारोह का आयोजन किया साथ ही सभी ने सीमाओं से परे होकर शान्ति की स्थापना के लिये मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया।




प्रत्येक 5 से 7 वर्ष के पश्चात शान्ति की स्थापना के लिये समकालीन चुनौतियों पर गहरी नैतिक सहमति बनाने, धर्मो से परे बहु-धार्मिक क्रियाकलापों को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से एक नयी विश्व परिषद का चुनाव करने के लिये विश्व सभा का गठन किया जाता है। पिछली विश्व सभाओं के माध्यम से किये जा रहे कार्यो के द्वारा बाल्कन, पश्चिम, मध्य पूर्व अफ्रीका, श्रीलंका, इंडोनेशिया में अत्यधिक सकारात्मक परिणाम मिले है। इसके माध्यम से राष्ट्रीय अंतर-धार्मिक परिषद् और समूह अपने स्वयं के देशों में जमीनी स्तर पर ठोस कारवाई करने के लिये बेहतर तरीके से कार्य करने हेतु प्रतिबद्ध है तथा शान्ति की स्थापना के लिये एक-दूसरे की प्रथाओं के आदान-प्रदान पर भी विश्वास करता है।

इस कार्यक्रम का उद्घाटन प्रेसिडेंट ऑफ जर्मनी फ्रेक वाल्टर स्टैनमीयर ने किया इस अवसर पर हेड ऑफ द यूनाईटेड नेशन्स अलायंस सिविलाइजेशन्स, सेक्रेटरी जनरल युनाइटेड नेशन्स, यूएनएओसी के उच्च प्रतिनिधि श्री मिगुएल मोरेटिनोस ने संयुक्त राष्ट्र के महासचिव की ओर से मुख्य भाषण दिया तथा अद्भुत व्यक्तित्व की धनी स्थानीय नेता लौरा मालिना सेइलर ने ’विजुअलाइजेशन फाॅर पीस’ का नेतृत्व किया। उद्घाटन समारोह में डाॅ विलियम एफ वेन्डले, शेख बिन बेयाह, लिंडौ के मेयर और विश्व के अनेक देशों के धार्मिक नेताओं ने सहभाग किया।

साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा कि ’’वर्तमान समय में पूरा विश्व शान्ति की खोज में है। पूरे संसार में, हमारे समुदाय में, हमारे परिवार में और हमारे अन्दर, शान्ति एक जरूरत बन चुकी है; एक सामान्य जरूरत किंतु दुर्लभ वस्तु। उन्होने कहा कि शान्ति को खोजना है तो पहले आन्तरिक शान्ति की खोज करें, सब लोग अपनी-अपनी शान्ति की खोज लेगे तो भयमुक्त समाज की स्थापना होते देर नहीं लगेगी। जब तक मनुष्य आन्तरिक शान्ति नहीं प्राप्त कर लेता तब तक बाह्य शान्ति स्थापित नहीें हो सकती। शान्ति कोई चीज नहीं है जिसे हमें खोजना पडे़। शान्ति हमारी प्राथमिक व अति मौलिक स्वभाव है। विभिन्न भावनाओं एवं आदतों रूपी धूल के आवरण से स्वर्णिम शान्ति के छिप जाने पर हम बैचेन हो जाते है, चिंतित हो जाते है, निराश हो जाते हैं और यहां तक की हम उग्र हो जाते हैं। जब आप शान्ति की अवस्था में होते हैं, तो आप शान्ति का स्राव करते हैं, शान्ति की अभिव्यक्ति करते हैं एवं शान्ति का प्रसार भी करते है। जब आप खण्डित होते है तब आप खण्डन का सा्रव करते है, खण्डन की अभिव्यक्ति करते हैं एवं खण्डन का प्रसार भी करते है। आईये अपनी शान्ति की तलाश करे।’’

शान्ति विश्व सभा में सभी धार्मिक नेताओं ने वैश्विक स्तर पर शान्ति की स्थापना के लिये मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया।
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