अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव के मंच से दिया विविधता में एकता का संदेश
- हिन्दू और मुस्लिम धर्मगुरू आये एक मंच पर
- भारत में अमन और शान्ति कायम रहे इस हेतु कि प्रार्थना
ऋषिकेश, 2 मार्च। परमार्थ निकेतन, अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव में आयोजित आध्यात्मिक सत्र के मंच पर आज समरसता और सद्भाव का अद्भुत संयोग था। इस मंच पर हिन्दू धर्मगुरू, शंकराचार्य और मुस्लिम धर्म के मौलाना और इमानों ने योगियों को सम्बोधित कर विविधता में एकता का संदेश दिया।

यह एक अद्भुत दृश्य था जब विश्व के विभिन्न देशों से आये योगियों को सम्बोधित करने के लिये हिन्दू धर्मगुरू, शंकराचार्य और मुस्लिम इस्लाम धर्म से मौलाना एवं इमामों ने एक मंच पर आकर भारत की एकता और अखण्डता का संदेश दिया। दक्षिण अमेरिका, उत्तरी अमेरिका, मध्य अमेरिका, यूरोप तथा विश्व के अन्य देशों से आये जनजाति प्रमुखों के समक्ष धरती पर अमन कायम रहे इसके लिये हमें मिलकर काम करना है का संकल्प लिया।
परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने संदेश दिया कि ’’हम एक है और एक रहेंगे’। उन्होने कहा भारत कोई भूमि का टुकडा नहीं बल्कि शान्ति की भूमि है। भारत के मूल में शान्ति, सद्भाव और समरसता के बीज समाहित है और वह हमेशा से शान्ति का उद्घोषक रहा है।’’

मौलाना वली उल्लाह साहब ने कहा कि ’’हिन्दुस्तान जैसा मुल्क पूरे संसार में नहीं है। यह सब से न्यारा और सबसे प्यारा भारत देश हमारा! हिन्दुस्तान हमारा!।
तत्पश्चात सभी ने मिलकर साथ रहने तथा पौधा रोपण, पर्यावरण संरक्षण, जल, जमीन और जंगलों के लिये मिलकर काम करने का संकल्प लिया।
यह अपने आप में बहुत ही विशेष, सुखद दृश्य था जो सब ने देखा। इस मंच पर सब ने साथ रहने का संकल्प ही नहीं किया बल्कि देश की एकता के लिये इस तरह के कार्यक्रमों की आवश्यकता भी बतायी और इस आयोजन हेतु भी अपनी प्रसन्नता व्यक्त की। इस अवसर पर देवबंद से विशेष रूप से पधारे मदरसों के प्रमुख मौलाना वलीउल्लाह साहब, मौलाना अब्दुल हन्नान साहब, मौलाना इकरामुल हक, हाफिस एच रहमान साहब, मौलाना सिबगतुल्लाह साहब के साथ अन्य ने किया सहभाग।’’
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